ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत में इन दिनों भारतीय-माओरी मूल की एक क्रिकेटर ने सनसनी मचा रखी है। 12 वर्षीय होप केरेटा ने क्रिकेट तो सिर्फ़ दो ही महीने खेला है लेकिन मेलबर्न शहर में ज़्यादातर क्रिकेटरों को उनके बारे में पता है। होप का क्रिकेटर बनना भी महज इत्तेफाक है।
ये डैंडेनौंग पश्चिम में लड़कों की अंडर-13 टीम से खेल रही हैं। इनके भाई इस टीम से खेलते थे और एक दिन जब डिस्ट्रिक्ट प्रतियोगिता के पहले टीम के खिलाड़ी पूरे नहीं पड़े तब होप केरेटा पास ही खड़ी थीं।
हिचकिचाते हुए होप ने अपना हाथ उठाया और लड़कों की टीम की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। क्योंकि होप ने पहले ही मैच में मध्यक्रम की बल्लेबाज़ी को संभाल लिया और तेज गेंदबाजों को भी सफल नहीं होने दिया।
होप केरेटा का सपना
उन्होंने बताया, "शुरुआत में तो मुझे भी यकीन नहीं आ रहा था लेकिन अब मैं क्रिकेट का मजा लेने लगी हूँ। अब मेरा सपना यही है कि एक दिन ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम के लिए खेल सकूँ।"
बहरहाल, इन दिनों होप केरेटा ने अपने इलाके के सभी बड़े गेंदबाजों के छक्के छुड़ा रखे हैं। जो बात काबिलेतारीफ है वो ये कि अपना छह घंटे का स्कूल खत्म करने के बाद होप दो घंटे क्रिकेट का अभ्यास करती हैं। उन्हें भी अहसास हो चला है कि शेन वॉर्न जैसे दिग्गज ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर भी पास ही के रहने वाले हैं।
केरेटा के पिता का सपना
होप के भारतीय मूल के पिता युवराज घलीद भी अब अपनी बेटी को क्रिकेट से जुडी हर सुविधा दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा, "मेरा सपना था कि होप एक सफल धावक बने लेकिन उसने क्रिकेट में अपने जौहर दिखा दिए।
मेरी पैदाइश न्यूज़ीलैंड में हुई तो मैं सिर्फ़ रग्बी खेलता रहा। लेकिन लगता है होप में मेरा भारतीय अंश है और उसने क्रिकेट विरासत में ले लिया है"।
युवराज घलीद को इस बात का भी बड़ा संतोष है कि होप ने स्थानीय क्लब हैम्पटन के ख़िलाफ़ शतक भी जड़ दिया है। वैसे होप केरेटा खुद कभी भारत तो नहीं गईं लेकिन उनको अहसास है कि उनके कुछ पूर्वज राजस्थान के रहने वाले थे।