आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और लोकसभा चुनावों की तैयारी में जुटी भाजपा को ये खबर मुश्किल में डाल सकती है। कैरवान पत्रिका के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को समझौता एक्सप्रेस बम धमाकों की जानकारी थी।
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पत्रिका ने धमाके मुख्य आरोपी स्वामी असीमानंद के इंटरव्यू के आधार पर दावा किया है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत धमाकों की साजिश से पूरी तरह वाकिफ थे और उन्होंने ही इसकी अनुमति दी थी।
गौरतलब है कि दिल्ली से लाहौर जा रही समझौता एक्सप्रेस में पानीपत के पास फरवरी, 2007 में धमाके हुए थे। स्वामी असीमानंद समझौता एक्सप्रेस बम धमाके, हैदराबाद की मक्का मस्जिद बम धमाका (मई, 2007) और अजमेर बम धमाके (अक्टूबर, 2007) के आरोप में अंबाला सेंट्रल जेल में बंद हैं।
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असीमानंद से मिले थे मोहन भागवत
बम धमाकों को लेकर असीमानंद ने कैरवान को कई इंटरव्यू दिए। इन साक्षात्कारों में असीमानंद ने बताया कि धमाकों के बारे में मोहन भागवत को जानकारी थी।
असीमानंद के मुताबिक, मोहन भागवत ने कहा था कि हिंसा जरूरी हैं, लेकिन इसमें संघ का नाम न जुड़े। जिन दिनों धमाकों की साजिश तैयार की जा रही थी, मोहन भागवत आरएसएस के जनरल सेक्रेटरी थे। असीमानंद के साथ उन्होंने बैठक की थी। हालांकि संघ ने पत्रिका के दावों को सिरे से खारिज किया है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भी पत्रिका के दावों को निराधार बताया। एनआईए सूत्रों ने कहा है कि असीमानंद ने पूछताछ के दौरान कभी संघ के किसी बड़े नेता का नाम नहीं लिया।
संघ ने इंटरव्यू पर सवाल उठाया
संघ ने असीमानंद के इंटरव्यू पर ही सवाल उठाया है। संघ प्रवक्ता मोहन वैद्य ने कहा है कि ये साक्षात्कार पूरी तरह बकवास और मनगढ़ंत है।
वहीं, आरएसएस नेता राम माधव ने कहा है कि असीमानंद ने इंटरव्यू दिया ही नहीं। उन्होंने बताया, 'असीमानंद के वकील ने एक बयान जारी करके कहा है कि उनके मुवक्किल का इंटरव्यू पूरी तरह से झूठा, निरधार और मनगढ़ंत है। असीमानंद ने ऐसे किसी भी इंटरव्यू से इनकार किया है।'
हालांकि पत्रिका ने दावा किया है कि अंबाला जेल में बंद असीमानंद से कई बार मुलाकात की गई है, जिनमें हुई बातचीत के आधार पर ये इंटरव्यू तैयार किया गया।
टेंट में हुई थी भागवत, असीमानंद की बैठक
पत्रिका का कहना है कि असीमानंद से धमाकों की साजिश के बारे में कई बार बात की गई। तीसरे-चौथे साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि बम धमाकों के लिए संघ के शीर्ष नेतृत्व ने अनुमति दी थी। ये सब मोहन भागवत के जरिए किया गया। असीमानंद के मुताबिक, भागवत उस समय संघ के जनरल सेक्रेटरी थे।
पत्रिका ने बताया कि असीमानंद और मोहन भागवत की मुलाकात जुलाई, 2005 में सूरत में आयोजित आरएसएस की एक बैठक के बाद हुई। संघ के शीर्ष नेता, जिनमें भागवत और इंद्रेश कुमार शामिल थे, डांग में एक मंदिर की यात्रा की। मंदिर में ही असीमानंद रहते थे।
मंदिर से कई किलोमीटर दूर एक टेंट में भागवत, इंद्रेश कुमार की असीमानंद के साथ बैठक हुई। बैठक में सुनील जोशी भी शामिल थे, जिनकी दिसंबर, 2007 में हत्या हो गई। जोशी ने वहां भागवत को मुस्लिमों से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों पर होने वाले बम धमाकों के बारे में बताया।
असीमानंद के मुताबिक, भागवत और इंद्रेश कुमार दोनों ने ही धमाकों की साजिश को अनुमति दी थी।
भागवत ने असीमानंद से कहा था, 'आप सुनील के साथ मिलकर योजना को अंजाम दें। हम इसमें शामिल नहीं होंगे लेकिन इसके साथ जुड़े रहेंगे।'
पत्रिका के मुताबिक, भागवत ने धमाकों के लिए अपना आशीर्वाद दिया था। उन्होंने असीमानंद से कहा था कि अगर आप ऐसा करते हैं तो कुछ भी बुरा नहीं होगा। किसी भी तरह का 'क्रिमिनलाइजेशन' नहीं होगा। अगर आप ऐसा करते हैं तो कोई ये नहीं कहेगा कि आप ने अपराध किया है। आपके साथ मेरा आशीर्वाद है।