भाजपा का दावा है कि वह नरेंद्र मोदी की लहर पर सवार होकर आगामी चुनावों में स्पष्ट बहुमत के जादुई आंकड़े 272 तक पहुंच जाएगी। उसे उम्मीद हो न हो, कम से कम वो फिलहाल बोल तो यही रही है।
लेकिन चुनावी सर्वे भी एक संभावना दिखा रहे हैं। उनके मुताबिक भाजपा लोकसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी और उसकी अगुवाई वाला एनडीए 200 सीटों के करीब पहुंच जाएगा, लेकिन यहां से 272 तक का लक्ष्य काफी दूर दिख सकता है।
इसकी वजह भी अलग है। भाजपा का सबसे बड़ा दांव नरेंद्र मोदी ही इस सूरत में उसका बोझ साबित हो सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो भाजपा को प्लान बी पर काम करना होगा। और प्लान बी पढ़कर आप हैरत में पड़ जाएंगे।
चंद्रबाबू होंगे एनडीए के पीएम दावेदार?
त्योरियां चढ़ाने और माथे पर शिकन बढ़ाने वाले इस अप्रत्याशित घटनाक्रम में तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू खास किरदार रखते हैं। और यही वजह है कि इन दिनों उनके और भाजपा के बीच काफी मोहब्बत देखने को मिल रही है।
सीन यह है कि अगर भाजपा अपने दम पर 200 से ज्यादा सीटें लाने में नाकाम साबित हुई, तो चंद्रबाबू नायडू की किस्मत खुल सकती है और वह एनडीए की तरफ से पीएम पद पर ऐसे दावेदार बन सकते हैं, जिन पर सभी की सहमति की मुहर होगी। भाजपा के शीर्ष नेताओं ने इस घटनाक्रम की जानकारी दी है।
नेताओं का कहना है कि भाजपा और टीडीपी के बीच चुनाव पूर्व औपचारिक गठबंधन के साथ-साथ नायडू के छुपे रुस्तम के तौर पर उभरने का आधिकारिक ऐलान संसद का मौजूदा सत्र खत्म होने के बाद किया जा सकता है।
सारा दारोमदार 200 सीटों पर टिका
भाजपा की तरफ से यह साफ है कि अगर उसके खाते में 200 से ज्यादा सीटें आईं, तो पीएम के तौर पर वह मोदी को देखना पसंद करेगी। भाजपा के एक शीर्ष नेता ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर जो कहा, उसे पढ़कर मोदी समर्थक हैरान रह जाएंगे।
उन्होंने कहा, "अगर हम 200 का आंकड़ा पार नहीं कर पाते, तो मोदी को पीएम की कुर्सी पर देखना मुश्किल होगा। हमें उम्मीद है कि भाजपा 200 से ज्यादा सीटें जीतेगी, लेकिन प्लान बी बनाना व्यावहारिक है।"
नेता ने कहा, "ऐसी सूरत में चंद्रबाबू नायडू स्वाभाविक पसंद होंगे, क्योंकि उनकी स्वीकार्यता कहीं ज्यादा है।" नायडू रंगा रेड्डी जिले के मलकाजगिरि या अनंतपुर जिले के हिंदूपुर से चुनाव लड़ सकते हैं।
क्यों अहम हो गए चंद्रबाबू?
टीडीपी के विधायक ए रेवंत रेड्डी ने भी बता दिया कि सरकार बनाने में उनके नेता की कितनी अहम भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा, "निश्चित तौर पर चंद्रबाबू नायडू केंद्र में बनने वाली सरकार में अहम किरदार अदा करेंगे।"
उन्होंने कहा, "और हम इस तथ्य से भी इनकार नहीं कर रहे कि वह पीएम पद के दावेदार हैं। जिस तरह चुनाव पूर्व गठबंधन हो रहा है, उसमें नायडू पीएम पद के ऐसे दावेदारों में काफी ऊपर आते हैं, जिनके नाम पर सहमति बन सकती है।"
रेड्डी यूं तो खुद भी लोकसभा में मलकाजगिरि से लड़ना चाहते हैं, लेकिन उनका कहना है कि अगर चंद्रबाबू नायडू यहां से लड़ने का फैसला करते हैं, तो वह उनके क्षेत्र के लिए काम करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, "अगर वो इस सीट से लड़ते हैं, तो मैं उनके कैम्पेन मैनेजर में से एक रहूंगा।" भाजपा के नेता चाहते हैं कि चुनाव बाद भी नायडू उनके पाले में रहें, क्योंकि मोदी के नाम पर हो सकता है कि कोई एनडीए में शामिल होने को तैयार न हो।
भाजपा के लिए आंध्र सबसे जरूरी
भाजपा के दिग्गज नेता वैंकय्या नायडू का कहना है कि तेलंगाना पर स्थिति साफ होने के बाद गठबंधन को लेकर संभावनाएं साफ हो सकती हैं और उन्हें लगता है कि ऐसा संसद सत्र खत्म होने के बाद मुमकिन हो पाएगा।
उन्होंने कहा, "हम गठबंधन की औपचारिकताएं तय करने से पहले तेलंगाना मुद्दे पर निगाह टिकाए हैं। आंध्र प्रदेश हमारे के लिए सबसे अहम राज्यों में से है, क्योंकि यहां हमारे सहयोगी काफी मजबूत है।"
पार्टी के सूत्रों का कहना है कि भाजपा के भीतर जो तबका मोदी के समर्थन में नहीं बताया जाता, वो भी इस पक्ष में कि चंद्रबाबू नायडू को साथ रखा जाए, क्योंकि चुनावों के बाद उन्हें पीएम के तौर पर पेश करने की जरूरत पड़ सकती है।
मोदी विरोधी तबके की कोशिश?
जो नेता चंद्रबाबू के पक्ष में बताए जा रहे हैं, उनमें मोदी के खिलाफ खड़ा धड़ा है। इनमें लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली शामिल हैं और ये सभी नायडू के संपर्क में बताए जाते हैं।
नायडू ने मंगलवार को आडवाणी और सुषमा से मुलाकात की और नेताओं का कहना है कि यह सामान्य बैठक से कहीं ज्यादा थी। नायडू दरअसल कांग्रेस को आंध्र के बंटवारे की ओर बढ़ने से रोकना चाहते हैं, ताकि सियासी फायदा उन्हें मिल सके। वह जनता दल युनाइटेड के संपर्क में भी हैं, जो मोदी का विरोध करती है।
चंद्रबाबू को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है, ऐसे में भाजपा का मानना है कि वह चुनावों के बाद दूसरे दलों को खींचने में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। आंध्र में कुल 42 सीट हैं और टीडीपी सीमांध्र इलाके में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है, जहां लोकसभा की 25 सीटें हैं। पार्टी चंद्रबाबू से काफी उम्मीद कर रही है, जो आगामी चुनावों में चीजें उलटने का दावा कर रहे हैं। भाजपा इस वजह से मौजूदा स्वरूप में तेलंगाना बिल का समर्थन न करने पर भी राजी हो गई है।