बॉलीवुड अभिनेत्री शबाना आजमी में पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों और कलाकारों के समर्थन में उतर आई हैं। शबाना ने रविवार को कहा कि ‘बढ़ती असहिष्णुता’ के प्रति जागरूकता के लिए पुरस्कार लौटाना ‘सांकेतिक भाव’ है। 65 वर्षीय अभिनेत्री की यह प्रतिक्रिया एफटीआईआई छात्रों के समर्थन में शीर्ष फिल्मी हस्तियों की ओर से राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाने के बाद आई है।
शबाना ने ट्विटर पर लिखा, ‘यह ऐसा और वैसा नहीं है। कलाकारों का पुरस्कार लौटाना उनकी कृतियों में भी दिखेगा लेकिन फिल्म बनाने और किताब लिखने में समय लगता है। पुरस्कार लौटाना ध्यान आकर्षित करने के लिए सांकेतिक भाव है।’ पिछले सप्ताह आनंद पटवर्धन, दिबाकर बनर्जी, परेश कामदर, निष्ठा जैन, कीर्ति नखवा, हर्षवर्धन कुलकर्णी, हरि नायर, राकेश शर्मा समेत दस फिल्मकारों ने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाया था।
Its not an either or. Artists returning awards will also reflect their concern in their work but making a film writing a book takes time— Azmi Shabana (@AzmiShabana) November 1, 2015
'जो नहीं चाहते हैं कि देश में कभी भी भाजपा की सत्ता रहे'
इससे पहले देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली एक बार फिर से पीएम नरेंद्र मोदी के पक्ष में खुलकर आगे आते हुए विपक्ष के लोगों पर हमला बोला है। देश में बढ़ती असहिष्णुता पर बोलते हुए अरुण जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार लगातार देश की विकास दर को बढ़ाने के लिए काम कर रही है।
पर दूसरी तरफ देश में ऐसे लोग भी हैं, जो नहीं चाहते हैं कि देश में कभी भी भाजपा की सत्ता रहे। अरुण जेटली ने सीधे कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा के चिंतक और एक्टिविक्ट को भी अपने निशाने पर ले लिया।
उन्होंने दावा किया कि ये वही लोग हैं जो भाजपा के प्रति वैचारिक असहिष्णुता को कई सालों से दर्शा रहे हैं।
(function(d, s, id) { var js, fjs = d.getElementsByTagName(s)[0]; if (d.getElementById(id)) return; js = d.createElement(s); js.id = id; js.src = "//connect.facebook.net/en_GB/sdk.js#xfbml=1&version=v2.3"; fjs.parentNode.insertBefore(js, fjs);}(document, 'script', 'facebook-jssdk'));The Ease of Doing BusinessThe World Bank has upped India’s ranking in the Ease of Doing Business by twelve positions....Posted by Arun Jaitley on Sunday, 1 November 2015
'नरेंद्र मोदी खुद इसी वैचारिक असहिष्णुता से सबसे ज्यादा पीड़ित'
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दावा किया कि वर्ष 2002 के बाद नरेंद्र मोदी खुद इसी वैचारिक असहिष्णुता से सबसे ज्यादा पीड़ित रहने वाले व्यक्तियों में से एक हैं।
जेटली ने कहा कि लोगों ने पहले संसद नहीं चलते दी, उन्हें डर था कि अगर संसद में कई प्रस्ताव पास हो जाएंगे तो इसका श्रेय मोदी सरकार को चला जाएगा। बाद में उन्हीं लोगों ने देश में सामाजिक कलह का माहौल प्रचारित कर दिया।
उन्होंने कहा कि दादरी एक अचानक हो जाने वाली घटना थी। वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय काम था। दादरी में एक बेगुनाह की मौत के गुनाहगारों को सजा जरूर मिलेगी।
अरुण जेटली ने अपनी पार्टी के लोगों को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि देश में इस समय जरूरी हो गया है कि भारत के सभी लोग और मौजूदा सरकार सुनिश्चित करे कि ऐसा कोई बयान और काम न हो, जिससे देश की विकास रफ्तार रूक जाए।