आंगनबाड़ी केंद्रों को सुचारु रुप से चलाने के लिए भले ही सरकार तमाम दावे कर रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी 61 फीसदी आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपना भवन नहीं है।
जबकि 52 फीसदी केंद्रों पर शौचालय और 32 फीसदी के पास पेयजल की सुविधा नहीं है। समेकित बाल विकास योजना के निष्पादन को लेकर नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुए हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों और महिलाओं के बैठने के लिए अलग कमरा, रसोई, खाद्य वस्तुओं के भंडारण के लिए गोदाम, बच्चों के लिए क्रीड़ा स्थल की पूर्ण व्यवस्था का निर्देश काफी पहले दिया जा चुका है।
इसके अलावा उपकरण और फर्नीचर के लिए न्यूनतम पांच हजार रुपये खर्च करने का प्रावधान भी किया गया है। मगर कैग ने जांच में यह पाया कि करीब 65 फीसदी आंगनबाड़ी केंद्रों में खाना बनाने के लिए रसोई की अलग से व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है।
55 फीसदी केंद्रों में खाद्य वस्तुओं के भंडारण की व्यवस्था नहीं है। 52 फीसदी केंद्रों में टेबल और कुर्सी जैसे आधारभूत फर्नीचर तक भी नहीं हैं। महत्वपूर्ण यह है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए 46 फीसदी आंगनबाड़ी केंद्रों में ब्लैकबोर्ड की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में इन केंद्रों के जरिये बच्चों की देखभाल और पढ़ाई की स्थिति का अंदाजा खुद लगाया जा सकता है।
कैग ने इन केंद्रों पर खर्च होने वाली निधि के इस्तेमाल में कमी, बेवजह खर्च और खर्च में गड़बड़झाले को लेकर फटकार भी लगाई है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालयों को इस बाबत गंभीरता से ध्यान देने को कहा है।