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खाद्य सुरक्षा नहीं, नक्सली मुद्दे पर होगी सर्वदलीय बैठक

Tue, 04 Jun 2013 12:08 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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छत्तीसगढ़ में कांग्रेसी नेताओं पर हमले के बाद यूपीए सरकार ने नक्सलवाद के मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाते हुए सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है।
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दरअसल, सरकार ने स्पष्ट जाहिर किया है कि यह बड़ा नक्सली हमला था, ऐसे में सिर्फ राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच का ऐलान कर जिम्मेदारी पूरी नहीं की जा सकती।

सोमवार को यूपीए के घटक दलों की बैठक में संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि ये लोकतंत्र पर हमला है। सरकार जल्द ही इस मसले पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय करेगी।
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वहीं, बैठक शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही चर्चा के एजेंडे से खाद्य सुरक्षा विधेयक को हटाकर नक्सली समस्या पर ध्यान केंद्रित कर दिया गया। सरकार ने इस मसले पर सभी विकल्प खुले होने की बात कही है।

वहीं सपा ने खाद्य सुरक्षा विधेयक के खिलाफ झंडा बुलंद कर दिया है, जिसके चलते यूपीए सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री निवास सात रेसकोर्स रोड पर हुई यूपीए समन्वय समिति की बैठक में नक्सलवाद के मुद्दे पर लंबी बहस चली।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी में हुई इस बैठक में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने छत्तीसगढ़ के नक्सली हमले के चिंताजनक आयामों का ब्योरा पेश किया।

खास बात यह है कि इस नक्सली हमले को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने सामने हैं। दोनों दल एक-दूसरे पर नक्सलियों से साठगांठ होने का खुला आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में यह सर्वदलीय बैठक अहम मानी जा रही है।

वहीं छत्तीसगढ़ की रमन सरकार की ओर से पिछले हफ्ते प्रदेश स्तर पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का कांग्रेस ने बहिष्कार किया था। इस चलते भी भाजपा की राष्ट्रीय कमान पर बैठक में शामिल होने को लेकर सबकी नजरें है।

यूपीए समन्व्य समिति की बैठक के बाद संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि सर्वदलीय बैठक की तारीख सभी दलों से बात कर उनकी सुविधा के मुताबिक तय होगी।

कुछ दिनों में गृहमंत्री नक्सल प्रभावित राज्यों की बैठक बुलाने जा रहे हैं और मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन बुधवार को है। इसके बाद सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाएगी। वहीं खाद्य सुरक्षा विधेयक के मुद्दे पर कमलनाथ ने कहा कि बैठक में इस मुद्दे पर कोई बात नहीं हुई। सरकार ने सभी विकल्प खुले रखे हैं।

वहीं सूत्रों ने बताया कि बैठक का पहले एजेंडा खाद्य सुरक्षा पर संसद का विशेष सत्र बुलाना था। मगर भाजपा और वामदलों दोनों ने सरकार को सुझाव दिया है कि मानसून सत्र को तय समय से पहले ही बुला लिया जाए।

दोनों पार्टियों की राय को देखते हुए सरकार ने यूपीए की बैठक के एजेंडे से इसे आज हटा दिया। अब सरकार विपक्षी पार्टियों के सुझाव पर ही बात आगे बढ़ाने की कोशिश में है। मगर सरकार के लिए मुश्किलें आसान नहीं है।
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सपा ने इसे किसान विरोधी करार देते हुए बिल का विरोध करने की चेतावनी दी है। इससे भी सरकार की सियासी मुसीबतें बढ़ी है और फिलहाल ठोक बजाकर खाद्य बिल पर आगे बढ़ने की रणनीति बनी है।
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