सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके व्यक्ति को इस आधार पर पुलिस सुरक्षा मुहैया नहीं कराई जा सकती कि वह अहम पद पर रह चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यह टिप्पणी करते हुए उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार में मंत्री रह चुके रामवीर उपाध्याय को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। हाईकोर्ट में उनकी सुरक्षा को लेकर याचिका पहले से ही लंबित है।
जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस मदन बी लोकुर की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार का पक्ष जाने बिना किसी तरह का आदेश जारी नहीं किया जा सकता।
उत्तर प्रदेश सरकार बताए कि बसपा नेता और पूर्व मंत्री की किस प्रकार का खतरा है। अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख पांच जून तय की।
पीठ ने इस बात पर ताज्जुब जताया कि पूर्व मंत्री होने के नाते वह हक के तौर पर सुरक्षा मांग रहे हैं। अदालत ने कहा कि क्या आपको सिर्फ इस आधार पर वाई श्रेणी की सुरक्षा मिल सकती है कि आप मंत्री रह चुके हैं। इस तरह का अधिकार जताना समझ से परे है।
पीठ को उपाध्याय के वकील उदय ललित ने बताया कि बसपा नेता पर अब तक छह बार हमला हो चुका है। इस कारण वह अपनी सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट आए हैं।
राज्य में पिछले साल सत्ता परिवर्तन के बाद उपाध्याय की सुरक्षा हटा ली गई थी। मायावती सरकार में मंत्री पद पर रहते हुए रामवीर उपाध्याय को वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी।
इस समय सुरक्षा के नाम सिर्फ एक सशस्त्र सिपाही मुहैया कराया गया है।