अब इसे 2014 के लोकसभा चुनाव की सियासत कहें या फिर मुस्लिम तबके के प्रति हमदर्दी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने देश की राजधानी से मुस्लिमों की समस्याओं की आवाज बुलंद कर एक बड़ा संदेश देने का दांव चला है।
शनिवार को उन्होंने कहा कि कुछ मुस्लिम युवाओं पर झूठे मुकदमे लगे हैं। उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं। उत्तर प्रदेश सरकार इसकी गहराई से जांच कर रही है और इस सिलसिले में पुख्ता कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आतंकवाद के नाम पर किसी भी धर्म के निर्दोष लोगों का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा।
शनिवार को मुख्यमंत्री जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की ओर से दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में अपनी बात कह रहे थे। सम्मेलन की अध्यक्षता मौलाना सैयद अरशद मदनी ने की। अखिलेश ने कहा कि आतंकवाद के मामले में पकड़े गए निर्दोष युवकों की रिहाई का मुद्दा सपा हमेशा से उठाती रही है और संसद के इस सत्र में भी इसे उठाया जाएगा। अखिलेश ने देश में सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में सख्त कानून बनाने की पैरवी की।
सूत्रों के अनुसार इस कार्यक्रम में दूसरे दलों से भी मुस्लिम नेताओं को बुलाया गया था। मगर ज्यादातर आए नहीं। वहीं अखिलेश ने सम्मेलन में मुस्लिम वर्ग की समस्याओं पर खुलकर राय दी। उन्होंने कहा कि रंगनाथ मिश्र कमेटी ओर सच्चर कमेटी की रिपोर्ट पर अमल होना चाहिए। उत्तर प्रदेश में यह किस तरह लागू की जाए, इसे लेकर निंरतर विचर और मंथन किया जा रहा है।
अखिलेश ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम एकता में देवबंद का बहुत बड़ा योगदान है। आतंकवाद के नाम पर किसी भी निर्दोष पर उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। देश के विकास में मुस्लिमों का बड़ा योगदान है। हस्त एवं दस्तकारी का काम सबसे बेहतर मुस्लिम वर्ग ही करता है। इसलिए राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि गरीब महिलाओं को बांटे जाने वाली साड़ियों में से 60 फीसदी मुस्लिम भाइयों और बुनकरों से खरीदा जाएगा।