11 साल पहले संसद पर हुए हमले के दोषी अफजल गुरू को शनिवार सुबह आखिरकार फांसी पर लटका दिया गया। तिहाड़ जेल में सुबह 8 बजे उसे फांसी दी गई, इसके बाद जेल परिसर में ही उसे दफना दिया गया।
सरकार ने मुंबई हमले में शामिल आतंकी अजमल कसाब की फांसी की तर्ज पर ही अफजल की फांसी को भी बड़े गुप्त तरीके से अंजाम दिया। केंद्र ने इस फांसी से पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए सेना को भी अलर्ट पर रहने का आदेश दिया है।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 3 फरवरी को ही अफजल की फांसी के फरमान पर मुहर लगा दी थी। उन्होंने गृह मंत्रालय की दुबारा दी गई सिफारिश के बाद जम्मू-कश्मीर के सोपोर निवासी अफजल की दया याचिका खारिज कर दी। आतंकवाद पर नरम रवैये की तोहमत झेल रही सरकार ने अगले ही दिन इस पर अमल करने के आदेश जारी कर दिए।
44 वर्षीय अफजल की फांसी की खबर तिहाड़ से बाहर निकलते ही जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया और केबल टीवी प्रसारण बंद कर दिया गया। केंद्र ने सभी राज्यों को भी सतर्क रहने का निर्देश दिया है।
हालात को बारीकी से भांप रही सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली में मौजूद हुर्रियत के अलगवावादी नेता मीर वाइज उमर और सैयद अली शाह गिलानी को नजरबंद कर दिया है। साथ ही संसद हमले के मामले में बरी हुए एसएआर गिलानी को भी एहतियातन हिरासत में रखा गया है। अफजल की फांसी के डेढ़ घंटे बाद मीडिया से रू-ब-रू हुए गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि अफजल की फांसी में सभी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है।
शिंदे ने बताया कि अफजल की दया याचिका खारिज करने की अपनी सिफारिश उन्होंने 21 जनवरी को राष्ट्रपति को भेजी थी। इस पर 3 फरवरी को राष्ट्रपति की मुहर के बाद 4 फरवरी को उन्होंने हस्ताक्षर कर दिए। इसके बाद 9 फरवरी को अफजल को फांसी देना तय किया गया। इसके लिए कोर्ट से डेथ वारंट भी जारी कराया गया।
इस बीच, सभी राजनीतिक दलों और हमले में शहीद नौ सुरक्षा कर्मियों व एक कैमरामैन के परिवार ने इस फांसी को न्याय बताकर सरकार के फैसले को मजबूती दी है। 13 दिसंबर 2001 को संसद सत्र के दौरान पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के इस हमले के बाद दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच तनाव बढ़ गया था।
संसद हमला: कब क्या हुआ------------
13 दिसंबर, 2001 : जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकी संसद भवन परिसर में घुसे और अंधाधुंध फायरिंग की। हमले में नौ लोग शहीद हुए, जबकि 15 से अधिक घायल हो गए। सभी आतंकी भी मारे गए।
15 दिसंबर, 2001 : दिल्ली पुलिस ने मुख्य आरोपी मोहम्मद अफजल गुरू को श्रीनगर से गिरफ्तार किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हूसैन कॉलेज के एसएआर गिलानी और नवजोत संधु उर्फ अफसान गुरू तथा उसके पति शौकत हुसैन गुरू को भी गिरफ्तार किया गया।
29 दिसंबर, 2001 : कोर्ट ने अफजल गुरू को 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा।
14 मई, 2002 : अफजल गुरू, गिलानी, शौकत हुसैन गुरू और अफसान गुरू के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल, तीन पाक नागरिक भगोड़ा घोषित किए गए।
4 जून, 2002 : अफजल, गिलानी, शौकत और अफसान पर पोटा सहित अन्य आपराधिक कानूनों के तहत आरोप तय।
8 जुलाई, 2002 : चारों अभियुक्तों के खिलाफ सुनवाई शुरू।
25 नवंबर, 2002 : विशेष अदालत में सुनवाई पूरी हुई।
16 दिसंबर, 2002 : पोटा अदालत ने चारों अभियुक्तों को दोषी करार दिया।
18 दिसंबर, 2002 : पोटा अदालत ने अफजल गुरू, एसएआर गिलानी और शौकत हुसैन गुरू को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अफसान गुरू को पांच साल कैद की सजा सुनाई गई।
31 जनवरी, 2003 : मृत्युदंड के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील।
30 अगस्त, 2003 : जैश-ए-मोहम्मद नेता और संसद हमले का मुख्य आरोपी गाजी बाबा श्रीनगर में बीएसएफ के साथ मुठभेड़ में मारा गया। 10 घंटे तक चले मुठभेड़ में तीन अन्य आतंकी मारे गए थे।
29 अक्तूबर, 2003 : हाईकोर्ट ने अफजल की सजा को बरकरार रखा, प्रोफेसर गिलानी व अफसान गुरू बरी।
13 दिसंबर, 2003 : दिल्ली पुलिस ने गिलानी और अफशां को बरी करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
20 फरवरी, 2004 : सुप्रीम कोर्ट ने अफजल के मृत्युदंड की सजा के कार्यान्वयन पर रोक लगाई।
4 अगस्त, 2005 : सुप्रीम कोर्ट ने अफजल की मौत की सजा को बरकरार रखा। शौकत की मृत्युदंड की सजा 10 साल की कैद में तब्दील।
26 सितंबर, 2006 : दिल्ली की अदालत ने 20 अक्तूबर को अफजल को फांसी दिए जाने का आदेश दिया।
3 अक्तूबर, 2006 : अफजल की पत्नी तबस्सुम ने राष्ट्रपति से रहम की गुहार लगाई।
4 अक्तूबर, 2006 : अफजल की दया याचिका पर गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार से राय मांगी। तिहाड़ जेल अधीक्षक को याचिका पर अंतिम फैसला होने तक फांसी रोकने को कहा गया।
12 जनवरी, 2007 : सुप्रीम कोर्ट ने अफजल गुरू की पुनरीक्षण याचिका खारिज की।
19 मई, 2010 : दिल्ली सरकार ने अफजल की दया याचिका खारिज की।
30 दिसंबर, 2010 : शौकत हुसैन गुरू तिहाड़ जेल से रिहा।
10 दिसंबर, 2012 : केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि 22 दिसंबर को संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त होने के बाद वे अफजल की फाइल पर विचार करेंगे।