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विरोध के बाद मोदी सरकार ने लिया यू-टर्न

Tue, 22 Sep 2015 06:11 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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नई इनक्रिप्शन नीति के अंतर्गत 90 दिनों तक किसी भी मोबाइल अथवा कंप्यूटर से भेजे गए संदेश और ईमेल सहित यूनिकोड भाषा वाले सभी संदेशों को 90 दिनों तक सुरक्षित रखने वाले ड्राफ्ट पर केंद्र सरकार ने यू-टर्न लिया है।
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सरकार ने सफाई दी है कि नई इनक्रिप्शन नीति सोशल मीडिया पर लागू नहीं होगी। बताते चलें कि केंद्र सरकार नई राष्ट्रीय इनक्रिप्शन पॉलिसी लाने की तैयारी में है।

इसके लिए तैयार मसौदे पर लोगों से ऑनलाइन सुझाव मांगे गए हैं। नई इनक्रिप्शन नीति के तहत केंद्र सरकार द्वारा तैयार मसौदे में 90 दिन से पहले व्हाट्सएप, गूगल हैंगआउट, लाइन, वाइबर जैसे एप समेत कंप्यूटर या मोबाइल के जरिए भेजे गए इनक्रिप्टेड संदेशों को डिलीट करना गैर-कानूनी हो सकता था।
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ये होती समस्या

आम तौर पर सभी आधुनिक मैसेजिंग सेवाओं में उच्च स्तर के इनक्रिप्शन का इस्तेमाल किया जाता है और कभी-कभार सुरक्षा एजेंसियों के लिए इनके जरिए भेजे गए संदेशों को बीच में ही ट्रैक करना कठिन होता है।

यह मसौदा केंद्र सरकार के दिशानिर्देश इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा तैयार किया है। इस पर 16 अक्टूबर तक सुझाव मांगे गए हैं।

यदि यह नीति इसी दशा में लागू हो जाती तो व्हाट्सएप, गूगल हैंगआउट समेत अन्य मैसेंजर का इस्तेमाल करने वालों को परेशानी उठानी पड़ सकती थी।
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कांग्रेस ने कहा फांसीवादियों से यही उम्मीद

सरकार के इस प्रस्ताव के बाद विपक्षी ने पार्टियों ने इस गलत करार दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि यह फांसीवादी सरकार है और ऐसी सरकार से सिर्फ ऐसी ही नीतियों की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी का पागलपन है। इससे पहले वो मीट बैन कर के जनता के किचन तक गए और अब वो उनके बेडरुम तक जाना चाहते हैं।

जानेमाने वकील प्रशांत भूषण ने भी सरकार के इस कदम की आलोचना की थी और इसे तुरंत वापस लेने की भी मांग की थी।
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