नेपाल में भूकंप त्रासदी के बाद भूख ने बेहाल किया तो काम की तलाश में अब्दुल ने भी अपना घर छोड़ दिया। खाली पेट, फटे कपड़े और बुरा हाल मानों महीनों ऐसे ही सफर में किया हो।
त्रासदी से बाहर आया लेकिन मुसीबतों के जाल से नहीं। दर दर की ठोकरें खाते सुहागनगरी पहुंचा लेकिन आफत साथ ही लगी रही। शहर में कदम रखते ही हादसे का शिकार हो गया और अस्पताल पहुंच गया।
प्रशासन ने नेपाल भेजने से इनकार कर दिया है। ऐसे में सद्भावना समिति से जुड़े निर्भय गुप्ता उसकी मदद को आगे आए है और उसे उसे नेपाल पहुंचाने का संकल्प लिया है।
नेपाल निवासी अब्दुल रसीद अब हादसे में घायल होकर जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहा है। 25 अगस्त को फीरोजाबाद पहुंचे अब्दुल का रात्रि में 11 बजे एक्सीडेंट हो गया।
घायल हालत में पड़े अब्दुल की जेब से एक युवक पर्स और नकदी निकाल ले गया। मामला दो अलग-अलग मुल्कों का होने की वजह से प्रशासन भी हाथ खड़े करने लगा है।
बताया जा रहा है कि मजदूरी करने के लिए निकलने से पहले अब्दुल कुछ संपर्क सूत्र लेकर नेपाल से चला था। होश में आने पर अब्दुल ने खुद को जिला अस्पताल में पाया। दो दिन बाद नेपाली अब्दुल की मुलाकात निर्भय गुप्ता से हो गई। बजरंगी भाई की तरह उसे अब्दुल को नेपाल भेजने का संकल्प लिया है।