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बड़ी जीत के बावजूद फिलहाल पूरी नहीं होगी आप की ये हसरत

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दिल्ली में झाड़ू फेरने के बाद भी आम आदमी पार्टी को राज्यसभा की दहलीज लांघने के लिए तीन साल का इंतजार करना पड़ेगा। राज्यसभा में दिल्ली के कोटे से तीन सीटें है और ये 2018 से पहले खाली नहीं होंगी। इन सीटों पर जनवरी, 2012 में चुनाव हुए थे, विधानसभा में बहुमत होने के कारण कांग्रेस ने सभी पर जीत दर्ज की।
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कांग्रेस ने जनार्दन द्विवेदी, परवेज हाशमी और करण सिंह को राज्यसभा में भेजा था। आम आदमी पार्टी में भी प्रोफेसर आनंद कुमार, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, आशुतोष, कुमार विश्वास, संजय सिंह और मीरा सान्याल जैसे नेताओं की कतार है, जिन्हें राज्यसभा में भेजा जा सकता है, लेकिन पार्टी को इसके लिए 2018 तक का इंतजार करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि राज्यसभा में एक सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष का होता है। ऐसे में दिल्ली राज्यसभा का अगला चुनाव 2018 से पहले संभव नहीं है।

इतना जरूर तय है कि दिल्ली विधानसभा में 67 सीटें होने के कारण राज्यसभा चुनाव में आप के सदस्य निर्विरोध चुन लिए जाएंगे।
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लोकसभा चुनाव में हार गए आप के अधिकांश बड़े नेता

लगभग दो साल पहले गठित आम आदमी पार्टी के लोकसभा में चार सदस्य हैं। आप ने ये चारों ही सीटें पंजाब में जीती थीं। लोकसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने 432 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उन चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा था और अधिकांश सीटों पर उम्‍मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।

वैकल्पिक राजनीति देने के प्रयास में आम आदमी पार्टी ने उस समय अपने सभी बड़े नेताओं को अन्य पार्टियों के बड़े नेताओं के खिलाफ लड़ा दिया। मसलन अरविंद केजरीवाल ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ा। कुमार विश्वास ने अमेठी से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। आशुतोष ने दिल्ली की चांदनी चौक सीट से कांग्रेस नेता कपिल सिब्‍बल के खिलाफ चुनाव लड़ा। हालांक‌ि ये सभी हार गए।

दिल्ली के जीत के बाद आम आदमी पार्टी के रणनीतिकारों के बीच चर्चा है कि राज्यसभा में अपने नेताओं को भेजकर राष्ट्रीय राजनीति में दखल बढ़ाया जाए। हालांकि 2018 से पहले पार्टी का ये सपना पूरा होता नहीं दिखता।
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