फिल्म सड़क में महारानी का किरदार इसकी रिलीज से पहले ही चर्चित होने लगा था। जानिए फिल्म की मेकिंग के दौरान खुद सदाशिव अमरापुरकर का क्या कहना था इस रोल के बारे में...
वह खुद बताते हैं "ये जो किरदार है, अनोखा है। आधा मर्द है, आधा औरत है। यह कोठे चलाने वाला इंसान है। एक तरफ उसे औरतों जैसा रहन-सहन उसे अच्छा लगता है। कभी-कभी वह कोठे वाली औरतों को बुला कर उनके हाथों से साड़ी पहन कर, तैयार होकर अपनी फोटो खिंचाता है। दूसरी तरफ बात यह भी है कि वह औरतों की तरह दिखता नहीं है, उनके जैसी खूबसूरती और नजाकत उसके पास नहीं है।
ऐसे में वह औरतों से नफरत भी करता है। ठीक वैसे जैसे वह मर्दों से नफरत करता है। उसके साथ-साथ फिल्म में उसका भविष्य भी फिल्म में दिखाया गया है। दरवाजे पर एक बूढ़ा आदमी जो सदा कोठे के दरवाजे पर बैठा रहता है। कभी वह इस कोठे को चलाया करता था। यह आदमी उसे खिलाता है, पिलाता है और उसका ध्यान रखता है। वह जानता है कि मेरा भी भविष्य यही होने वाला है।
ये है तो विलेन, लेकिन इसे एक स्त्री का शेड दिया गया है। इस तरह का किरदार मैंने बहुत साल पहले कॉलेज में एक मराठी नाटक में किया था। जिसमें मैं एक गंधर्व के रोल में था। पुराने जमाने में मराठी में थियेटर में महिलाओं के किरदार पुरुष निभाते थे। यह ऐसे ही व्यक्ति की कहानी थी। इसलिए महारानी का रोल मेरे लिए कोई नया चैलेंज नहीं है।
हां, इसके मन की उमड़-घुमड़ कमाल है। यह मर्द भी है और औरत भी लेकिन उसे किस रोल में लोगों सामने आना चाहिए, इसके लिए वह टॉस करता है। उसके पास देवी का एक मुकुट है, जिसके सामने वह टॉस करके तय करता है कि उसे स्त्री के रूप में रहना चाहिए या पुरुष के रूप में। अपने अन्य फैसले भी वह टॉस करके लेता है। सिर्फ ऐसा नहीं कह सकते कि यह एक पुरुष ऐक्टर द्वारा निभाया स्त्री का कैरेक्टर है। असल में यह काफी जटिल है।