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पृथ्वीराज की पहली हीरोइन एर्मलीन

Mon, 23 Dec 2013 08:36 AM IST
रामकृष्ण
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एक बार पृथ्वी थिएटर में जब मैं दाखिल हुआ, तब यह देख आश्चर्यचकित था कि एक मामूली सी लगने वाली प्रौढ़ अभिनेत्री को पृथ्वीराज कपूर जरूरत से ज्यादा मान-सम्मान दे रहे हैं।
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पता करने पर मालूम हुआ कि उसका नाम एर्मलीन है और किसी जमाने में उसकी प्रतिभा का डंका बजता था। अरदेशियर ईरानी कृत मूक फिल्म `चैलेंज’ में उसने हीरोइन की भूमिका अभिनीत की थी और पृथ्वीराज भी उसी के माध्यम से पहली बार फिल्मी परदे पर अवतीर्ण हुए थे।  

भारतीय फिल्मों की शुरुआत में यहूदी वंश के लोगों का एकछत्र वर्चस्व रहा है। उसकी पहली नायिका सुलोचना यानी रूबी मेयर्स भी यहूदी थीं। उन दिनों उसका मासिक वेतन भारत के ब्रिटिश गवर्नर-जनरल से भी अधिक होता था।
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एर्मलीन भी उसी समय की थीं। उसकी मासिक आय भी दस हजार रुपए के आसपास थी। वह भी विक्टोरिया-एडवर्ड के जमाने में बने चांदी के रुपयों में। आज उन सिक्कों की कीमत हजार रुपयों को पार कर रही है। इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि दस हजार रुपयों की क्या वकत थी उन दिनों।

यह 1929 के आसपास की बात है। पृथ्वीराज उन्हीं दिनों पेशावर में अपने घर-परिवार को छोड़ कर काम की तलाश में मुंबई आए थे। जेब में कुल राशि थी पछत्तर रुपयों की।

जुनून था फिल्मी दुनिया में भरती होने का। उसकी तलाश में पहुंच गए तत्कालीन इम्पीरियल फिल्म स्टूडियो, जो उन दिनों केनेडी ब्रिज के निकट रॉयल ऑपेरा हाउस के बाजू में स्थित था।

जूनियर आर्टिस्टों की भरती की लाइन में वह खड़े ही हुए थे कि वहां आ पहुंची अपनी लंबी-चौड़ी मोटरगाड़ी पर आरूढ़ फिल्म की नामी-गिरामी हीरोइन एर्मलीन। उनकी नजर अकस्मात केंद्रित हो गई वहां पर अपनी बारी का इंतजार करते पृथ्वीराज पर।
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