इलियाना डिक्रूज की असली परीक्षा तो अब है। दरअसल किसी भी कलाकार की प्रतिभा का वास्तविक मूल्यांकन पहली फिल्म से ज्यादा दूसरी फिल्म करती है। साउथ से बॉलीवुड आईं इलियाना के कैरियर की दूसरी हिंदी फिल्म 'फटा पोस्टर निकला हीरो' इसी शुक्रवार को रिलीज होने जा रही है।
बर्फी के बाद उनकी दूसरी फिल्म उन्हें कितनी पहचान दिला पाती है इस बात का फैसला शुक्रवार को शायद हो जाए। अमर उजाला के साथ लंबी बातचीत में इलियाना डीक्रूज ने अपने कैरियर के कई मसलों पर खुलकर बात की।
तेलुगु और तमिल भाषाओं में पंद्रह फिल्में कर चुकी इलियाना डिक्रूज का नाम अब बॉलीवुड में भी चमक रहा है। अनुराग बसु निर्देशित फिल्म बर्फी में उन्होंने अपने अभिनय की अलग छाप छोड़ी थी।
प्रियंका चोपड़ा के होते हुए भी उनके अभिनय पर लोगों का पर्याप्त ध्यान गया था। इस बार तो वे सोलो हीरोइन हैं। राजकुमार संतोषी की फिल्म 'फटा पोस्टर निकला हीरो' में वे शाहिद कपूर के अपोजिट हैं।
इस फिल्म में उन्होंने काजल नाम की युवती का किरदार निभाया है। अपनी भूमिका के बारे में वे बताती हैं, 'मैं एक सोशल वर्कर बनी हूं। जहां भी कुछ गलत होता है, उसका विरोध करती हूं।
पुलिस स्टेशन जाना और रिपोर्ट लिखवाना जैसे मैं अपना धर्म समझती हूं। इसी चक्कर में नकली पुलिस कॉप विश्वास राव यानी शाहिद कपूर से मेरी मुलाकात होती है। कहने की जरूरत नहीं कि यह मुलाकात जल्द ही प्यार में बदल जाती है।
नाचने और गाने का खूब मौका
इलियाना को शाहिद कपूर के साथ अभिनय करने में तो कोई परेशानी नहीं हुई, लेकिन डांस करने में वे जरूर दिक्कत में आ गईं। फोर इंच हील वाली सेंडल पहन कर शाशा जैसे डांसर के साथ कदम मिलाना वाकई आसान नहीं था।
लेकिन इलियाना खुश हैं कि 'बर्फी' की पूरी कसर उन्होंने फिल्म 'फटा पोस्टर निकला हीरो' में निकाल ली है। 'बर्फी' में तो उन्हें नाच- गाने से दूर ही रखा गया था, लेकिन इस फिल्म में उन्हें मस्ती के सारे मौके मिले हैं। इन मौकों का उन्होंने पूरा फायदा भी उठाया है।
यूं इलियाना का कहना है कि काजल का किरदार उनसे एकदम अलग है। काजल तेज तर्रार है, लेकिन वे ऐसी नहीं हैं। निजी जीवन में वे काफी अंतर्मुखी और शर्मीली हैं।
परंतु किसी कलाकार के लिए यही सबसे बड़ी चुनौती होती है कि वह परदे पर एकदम अलग दिखे। वह ऐसी करामात कर दिखाए, जिसकी कि उससे उम्मीद ही नहीं की जा सकती थी। इलियाना का बॉलीवुड में कोई गॉडफादर नहीं है।
बिना गॉडफादर के भी जम सकती हूं
वे साउथ की इंडस्ट्री में पांव जमा चुकी थीं, फिर भी उन्होंने हिंदी फिल्मों में काम करने की सोची और मुंबई आ गईं। कहीं उन्होंने बड़ा रिस्क तो नहीं ले लिया? इलियाना पूरे आत्मविश्वास के साथ कहती हैं कि अब वक्त बदल चुका है। बिना गॉडफादर के भी काम किया जा सकता है। बकौल इलियाना, उन्हें संतोषी जी ने काजल की भूमिका बर्फी देखने के बाद ही दी।
यानी किसी कलाकार में टेलेंट है, तो उसे पिछली फिल्म में काम के आधार पर नई फिल्म आसानी से मिल जाएगी। लेकिन साउथ और मुंबई की फिल्मों में तो पर्याप्त अंतर होता है? दोनों इंडस्ट्री में काम करने के तौर तरीके काफी अलग हैं। उन्हें बॉलीवुड का मिजाज कैसा लगता है? इलियाना बताती हैं, 'इस बात में कोई दो राय नहीं कि साउथ की फिल्में बॉलीवुड की तुलना में ज्यादा कलरफुल होती हैं।
हिंदी फिल्मों में भी फिट
ज्यादातर फिल्मों में लार्जर दैन लाइफ किरदार होते हैं। लेकिन बॉलीवुड की पहुंच बहुत ज्यादा है। इसके अलावा मुंबई में अब ऐसी रियलिस्टिक फिल्में बनने लगी हैं, जिनमें बड़े एक्सपेरिमेंट हो रहे हैं। बॉलीवुड के प्रति आकर्षित होने की मेरी सबसे बड़ी वजह यही है।
इलियाना को चौथे खान यानी सैफ अली खान के साथ काम करने का मौका मिल चुका है। वे फिल्म हैप्पी एंडिंग में उनकी हीरोइन हैं। अपने हमउम्र हीरो वरुण धवन के साथ वे फिल्म मैं तेरा हीरो में काम कर ही रही हैं। अपने एक्टिंग पैटर्न के बारे में वे बताती हैं, 'मैं स्पोंटिनियस कलाकार हूं। मैं अपने रोल की कोई तैयारी नहीं करती। जैसा डायरेक्टर आदेश देता है, उसी का पालन करती हूं।