रेशमी (नाम बदला हुआ) ने लव मैरिज की थी फिर भी वो पति के पाशविक रेप का शिकार हुई। उसने सुप्रीम कोर्ट में जाकर पति के अन्याय से इंसाफ चाहा तो सुप्रीम कोर्ट ने विवाह की पवित्रता का हवाला देते हुए रेशमी की अपील को ठुकरा दिया। लेकिन रेशमी ने हार नहीं मानी है वो इस जंग को आगे लेकर जाने के लिए तैयार है।
बात हो रही है सुप्रीम कोर्ट में मेरिटल रेप की याचिका दायर करने वाली उस युवती की जिसे अदालत ने भी मायूस कर दिया। इस युवती ने फरवरी में पति के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी। अदालत ने यह कहते हुए युवती की याचिका को खारिज कर दिया कि मेरिटल रेप जैसे मामलों के लिए कोई कानून नहीं है। पत्नी चाहे तो घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करा सकती है।
प्रेम विवाह और रोज रोज का रेप
रेशमी ने कहा कि उसने कालेज में साथ पढ़ने वाले सहपाठी से प्रेम विवाह किया था। तब उसका व्यवहार काफी अच्छा और सभ्य था। लेकिन शादी के कुछ ही दिनों बाद पति का व्यवहार बदल गया।
वो प्रेम की बजाय जबरदस्ती करने लगा। वो रोज रोज तो सेक्स की फरमाइश करता और जबरदस्ती करता। रेशमी मना करती तो वो रेप करता।
रेशमी ने कहा कि कई बार पीरियड्स होने के चलते मैं उसे संबंध बनाने से मना करती तो वो मेरे साथ मारपीट करने के बाद संबंध बनाता। इस बात को लेकर हमारे बीच रोज लड़ाई होने लगी थी। मैं रोज रोज के इस रेप से परेशान हो उठी थी।
जन्मदिन के दिन गुप्तांग में टार्च घुसा दी
रेशमी 14 फरवरी का दिन याद करके ही कांप जाती है। उसने कहा कि 14 फरवरी को उसके पति का जन्मदिन था और किसी बात को लेकर इन दोनों के बीच तककार हुई। रात को पति ने मेरा बलात्कार किया और प्रतिरोध करने की सजा के तौर पर मेरे गुप्तांग में टार्च घुसा दी। मैं दर्द से चीखती रही और उसने मेरा मुंह दबा दिया।
इस हादसे के बाद मैं साठ दिन तक अस्पताल में रही और मेरे गुप्तांग से रक्तस्राव होता रहा। इस हादसे के बाद मैंने तय किया कि इंसाफ मिलने तक चुप नहीं बैठूंगी।
पहचान बताई तो घर से निकाल देगा मकान मालिक
रेशमी ने बीबीसी से एक इंटरव्यू में कहा कि वो कोर्ट जाते वक्त मुंह छिपा लेती है, वो अपनी पहचान छिपा कर रहती है क्योंकि पहचान उजागर हो गई तो उसका मकान मालिक उसे घर से निकाल देगा। उसने कहा कि हमारे समाज में पति की ज्यादती का विरोध करने वाली औरत को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता।
उसने कहा कि जब मैंने पति की ज्यादती का विरोध किया तो उसने मुझपर और ज्यादा जुल्म किए। मैंने प्रेम विवाह किया था और इस लिहाज से मेरे माता पिता ने भी मेरा साथ नहीं दिया। जब मैं न्याय मांगने के लिए घर से बाहर निकली तो वहां भी मुझे ही दोषी समझ कर मेरा साथ नहीं दिया गया। क्या शादी का मतलब पति की जबरदस्ती सहना है।