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ये है महिलाओं के लिए 'गंदे' भारत का नक्शा

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''ये मामला 2006 का है। मैं दिलसुख नगर में अपने कॉलेज जा रही थी। बस से उतरकर मैं आगे बढ़ी ही थी की अचानक कुछ लोग मेरी तरफ आए उनमें से एक ने मेरी छाती पर हाथ मारा और मुझे दबोचने की कोशिश की। फिर वो तेज़ी से आगे बढ़ गए। वहां कई लोग थे लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा। मैंने ज़िंदगी में इतना ख़राब कभी महसूस नहीं किया। इसके बाद मैं कई दिन तक कॉलेज नहीं गई। यशोदा अस्पताल के पास मलकपेट फ्लाइओवर के नीचे कई लड़कियों के साथ ये घटना घट चुकी है।''
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हर बीस मिनट में एक महिला का बलात्कार

भारत में हर तीन मिनट में एक महिला के साथ हिंसा की कोई घटना घटती है और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक हर बीस मिनट में एक महिला का बलात्कार हो रहा है। ये वो अपराध हैं जो थानों में दर्ज हुए लेकिन दिलसुख नगर की ये घटना इन आंकड़ों में कहीं शामिल नहीं।

ऐसी और इस तरह की हज़ारों गुमनाम घटनाओं को दर्ज करने और उनके खिलाफ़ कार्रवाई का माहौल बनाने के लिए ही दिल्ली और मुंबई के चार नौजवानों ने मिलकर सेफ़सिटी नाम की बेवसाइट की शुरुआत की है।
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'सेफ़सिटी' पर कोई भी व्यक्ति कभी भी यौन दुर्व्यवहार, छेड़छाड़, बलात्कार या इस तरह के दूसरे यौन अपराधों की जानकारी दर्ज करा सकता हैं। मकसद है यौन अपराधों को दर्ज कराने की प्रक्रिया को खासतौर पर महिलाओं के लिए आसान बनाना।

'सेफ़सिटी' की नींव रखने वाली सूर्या वेलामरी, एल्सा डिसिल्वा, सलोनी मल्होत्रा और आदित्य की मुलाकात स्वीडन में एक कोर्स के दौरान हुई।

सूर्या बताती हैं, ''अपने कोर्स के दौरान हम लोगों ने महिलाओं के अधिकारों और यौन हिंसा के खिलाफ़ काम करने का मन बनाया। इस बीच हम स्वीडन से लौटे और कुछ ही दिन बाद दिल्ली में हुए बर्बर बलात्कार ने पूरे देश को झकझोर दिया। इसके बाद अगले पांच दिन में हमलोगों ने मिलकर सेफ़सिटी की शुरुआत की।

यौन अपराधों का एक डाटा-बैंक

'क्राउड सोर्सिंग' यानी भीड़ से जानकारियां जुटाने की कोशिश पर आधारित 'सेफ़सिटी' का मकसद भारत के हर शहर और इन शहरों के अलग-अलग इलाकों में होने वाले यौन अपराधों का एक डाटा-बैंक तैयार करना है। ताकि सुरक्षित-असुरक्षित इलाकों के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा और पुख़्ता जानकारी उपलब्ध हो। ये सभी घटनाएं एक नक्शे पर दर्ज होती जाती हैं।

वेबसाइट पर दर्ज करने के लिए यौन आपराधों को कई श्रेणियों में बांटा गया है। कोशिश की गई की भारत में महिलाओं के खिलाफ़ होने वाले हर तरह के अपराध को किसी न किसी श्रेणी में शामिल किया जा सके। मसलन अश्लील इशारे करना, गुप्तांग दिखाकर किया जाने वाला यौन उत्पीड़न, छूने और पकड़ने की कोशिश, तस्वीरें लेना और परेशान करने वाली इस तरह की कई हरकतें।

क्राउडसोर्सिंग के ज़रिए महिलाओं के खिलाफ़ हिंसा को दर्ज कराने के लिए इस तरह की पहली कोशिश ऊशाहिदी नाम के ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के ज़रिए मिस्र में हैरेस मैप नाम से हुई। इसके बाद दुनियाभर में अबतक इस तरह के तीन से चार सफल प्रयोग सामने आए हैं।

सूर्या कहती हैं, ''लड़कियां आमतौर पर शर्म और डर की वजह से इस तरह की घटनाओं के बारे में किसी को नहीं बताती हैं। सेफ़सिटी जैसी वेबसाइट न सिर्फ़ लड़कियों को खुलकर बोलने का मौका देती हैं बल्कि दूसरी लड़कियों की रिपोर्ट पढ़कर उन्हें इस बारे में बोलने की हिम्मत भी मिलती है।''

पुरुषों के साथ हुए गलत बर्ताव

13:41/ December 29/ 2012
"मुंबई के कल्यान इलाके में चार लोगों ने 14 साल के एक लड़के के साथ अप्राकृतिक दुराचार किया गया। उसके गुप्तांगों को सिगरेट से जलाने के अलावा इन लोगों ने उसके बाल मुंडा दिए। बाद में इस सड़के के पिता की पिटाई की गई ताकि वो पुलिस के पास न जाएं। "
कल्यान, महाराष्ट्र, भारत

पिछले एक साल में सेफ़सिटी पर अबतक 958 मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें सबसे ज़्यादा यानी 775 मामले दिल्ली के हैं। यहां तक कि कुछ मामले ऐसे भी हैं जिनमें पुरुषों के साथ हुए गलत बर्ताव का ज़िक्र भी किया गया है।

सेफसिटी का मकसद एक ऐसे फोरम के रुप में काम करना है जिसके ज़रिए किसी भी शहर के सुरक्षित-असुरक्षित इलाकों के बारे में पूरी जानकारी मिल जाए। किसी अनजान शहर में आपके लिए मुश्किलें पैदा न हों इसलिए वहां जाने से पहले उस इलाके का पूरा आपराधिक ब्योरा इस वेबसाइट के ज़रिए हासिल किया जा सकता है।

मसलन सेफसिटी पर हैदराबाद के 20 मामले दर्ज हैं। हैदराबाद से जुड़ी ज़्यादातर रिपोर्ट महिलाओं से छीना-झपटी और उनके पर्स-गहने चुराने से जुड़ी हैं। जबकि मुंबई में दर्ज ज़्यादातर 53 घटनाएं यौन दुराचार और लोकल-ट्रेन में होने वाले यौन अपराधों से जुड़ी हैं।

सेफ़सिटी ऐप
सेफसिटी पर कई लोग अब ट्विटर के ज़रिए भी जुड़े हैं। कई महिलाएँ हैं जिन्होंने अपने साथ घटी किसी घटना के बारे में खुलकर ट्विटर पर लिखा है। सूर्या मानती हैं कि इसकी देखादेखी दूसरी महिलाओं को भी आगे आने की हिम्मत नहीं है।

सूर्या और उनके साथियों का मकसद अब मोबाइल के ज़रिए इस फ़ोरम को और कारगर बनाने का है। सूर्या कहती हैं, ''हम इन दिनों एक ऐसा ऐप बनाने की तैयारी कर रहे हैं जो मुसीबत के वक्त आपको उन सभी दोस्तों और परजनों से जोड़ेगा जिनके पास सेफ़सिटी ऐप हो। मुसीबत के वक्त ये ऐप आपके सभी दोस्तों और जिस इलाके में आप मौजूद हैं वहां रहने वाले दूसरे यूज़र्स को एलर्ट भेजेगा ताकि जल्द से जल्द आपकी मदद के लिए कोई पहुंच सकें।''

सेफ़सिटी ने गोवा पुलिस के साथ मिलकर काम करने की भी पहल की ताकि जो महिलाएं घटना पर पुलिस कार्रवाई चाहती हैं उनकी रिपोर्ट दर्ज हो सके। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से रिपोर्ट इक्कठी कर पुलिस पर सड़कों को सुरक्षित बनाने, रात में गश्त बढ़ाने और मनचलों की गिरफ़्तारी का दबाव बनाने की भी योजना है।

तकनीक के सहारे महिलाओं के खिलाफ़ बढ़ते यौन अपराधों को रोकने के लिए कई नई कोशिशें की जा रही हैं। पिछले दिनों फिल्म अभिनेत्री कल्की केकलां का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वाइरल हुआ है। 'इट्स माई फॉल्ट' नाम के इस वीडियो के ज़रिए कल्की ने यौन हिंसा के लिए महिलाओं को ज़िम्मेदार ठहराने वालों पर बखूबी कटाक्ष किया।

सेफ़सिटी हो या इस तरह की दूसरी कोशिशें 'क्राउडसोर्सिंग' का फार्मुला 'एक और एक ग्यारह' पर आधारित है। ज़ाहिर है जितनी बड़ी संख्या में लोग इनसे जुड़ेंगे बदलाव उतना ही बड़ा और कारगर होगा।
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