मन का गुबार, दिल की कसक, जेहन की उथल-पुथल और मुद्दों पर मश्विरा-नसीहत को जब से बयां होने के लिए सोशल मीडिया का डिजिटल मंच मिला है तब से न सिर्फ विचारों की अभिव्यक्ती को एक सशक्त माध्यम मिला बल्कि अंधे-बहरे और गूंगे कहे जाने वाले कानून के सामने एक जनप्रिय लोक अदालत का विकल्प मिला है।
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साल 2015 में सोशल मीडिया की पहल से गुनाह, गुनहगारों और पीड़ितों के उन तमाम मामलों ने दुनियाभर का ध्यान खींचा जिनपर शासन-प्रशासन की या तो नजर नहीं पड़ी या नजर अंदाज कर दिए गए।
आज जहां सड़क, संसद, सियासत और अदालत का सवाल है, हुड़दंग और मूकदर्शकों का जमावड़ा देखा जा सकता है, इसके उलट सोशल मीडिया मुद्दों को उठाने से लेकर हल करने तक का बेहतर माध्यम बनती जा रही है।
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ये साल कुछ ऐसे अहम मुद्दों को छोड़कर जा रहा है जिनके लिए सोशल मीडिया न सिर्फ बैशाखी बनी बल्कि कुछ को अंजाम तक पहुंचाया। इन्हीं में एक यूपी के दादरी का मुद्दा।
दादरी की घटना और पटना के वीमेंस कॉलेज का अश्लील मामला
अज्ञात खाते की वो पोस्ट देश के लिए नासूर बनते-बनते रह गई, जिसमें जिक्र किया गया कि अल्पसंख्यक समुदाय के लड़के को गोमांस को लेकर एक बड़े हुजूम ने पीट-पीट कर मार दिया। भड़काऊ पोस्ट को वायरल होते देर नहीं लगी। सड़क से लेकर संसद तक हंगामा हुआ। सुरक्षा बलों को दादरी में तैनात किया गया।
यूपी सरकार ने भारी मुआवजे से पीड़ित परिवार के जख्मों पर मरहम लगाया। अदालत ने भावनाएं भड़काने वाले अज्ञात खाताधारक के खिलाफ कार्रवाई का आदेश तक दिया। मामला कई दिनों तक मीडिया की सुर्खियों में छाया रहा।
इस मामले ने देश में असहिष्णुता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी। जिसमें सोशल मीडिया ने अहम भूमिका निभाई। असर ये हुआ कि तमाम साहित्यकारों ने पुरस्कार वापस कर असहिष्णुता के खिलाफ प्रदर्शन किया।
वहीं पटना के वीमेंस कॉलेज में कुछ छात्राओं ने सोशल मीडिया पर कॉलेज के ही एक शिक्षक के खिलाफ शिकायती पोस्ट डाली। फेसबुक पर पोस्ट वायरल होते ही लोगों ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी। शिक्षक पर आरोप था कि अंक बढ़ाने का झांसा देकर उसने छात्राओं के साथ अश्लील हरकतों को अंजाम दिया।
सोशल मीडिया का ऐसा असर हुआ कि स्थानीय पुलिस अमला मामले की जांच-पड़ताल में मुश्तैद दिखा। वहीं शिक्षक को सस्पेंड कर दिया गया।
खाप का वहशी फरमान और सोनाक्षी सिन्हा की कमेंट वापसी
बागपत में एक दलित युवक के जाट लड़की से शादी करने के बाद इलाके की खाप पंचायत ने एक वहशी फरमान सुना दिया। खाफ ने कहा कि लड़के की दो बहनों का मुंह काला कर उन्हें बिना कपड़ों के घुमाया जाए और उनका रेप किया जाए।
मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई जिसपर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने यूपी सरकार को तुरंत पीड़ितों को संरक्षण देने को कहा। अखलेश सरकार को बागपत में तुरंत पीएसी और पुलिस लगानी पड़ी।
मामला सोशल मीडिया पर आया तो वायरल होती देर नहीं लगी। असर ये हुआ कि दुनियाभर से खाफ के वहशी फरमान का विरोध शुरू हो गया। विदेशी लोग पीएम नरेंद्र मोदी को सलाह देते नजर आए कि मामले को गंभीरता से लिया जाए।
वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा जसलीन कौर की एक पोस्ट इस तरह वायरल हुई कि अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा तक ने ट्विटर पर शाबासी भरा कमेंट दे दिया। जसलीन ने सर्वजीत नाम के लड़के पर ट्रैफिक सिग्नल पर बदतमीजी करने का आरोप लगाया था और उसकी फोटो फेसबुक पर डाल दी थी।
लड़के पर पुलिसिया कार्रवाई भी हुई लेकिन बाद में लड़के ने भी फेसबुक का सहारा लेते हुए बताया कि जसलीन आम आदमी पार्टी की सदस्य हैं और सस्ती लेकप्रियता के लिए ये सब कर रही हैं। इस पर सोनाक्षी ने अपना कमेंट वापस ले लिया।
खुदकुशी के लिए सोशल मीडिया जिम्मेदार या वो पांच गुनहगार?
मध्यप्रदेश के देवास के सोनगांव में मोबाइल गुम हो जाने के बाद एक दंपति का निजी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इससे आहत होकर पति-पत्नी ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली। मामले में पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया।
वहीं धर्मशाला के एक स्थानीय कालेज के गैंगरेप के मामले ने सोशल मीडिया पर खूब जोर पकड़ा। बताया गया कि एक छात्रा का सामूहिक बलात्कार कर हत्या कर दी गई। लेकिन बाद में पता चला कि पोस्ट झूठी थी।
सीएम ने बूढ़े हाथों को दिया टाइपराइटर और केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन
सोशल मीडिया ने यूपी में न सिर्फ एक दरोगा की नापाक हरकत उजागर की बल्कि एक बुजुर्ग की रोजी-रोटी भी बचा ली। लखनऊ के गोमतीनगर निवासी कृष्ण कुमार जीपीओ के सामने फुटपाथ पर टाइपिंग कर गुजारा करते हैं। खाकी की ठसक में चौकी प्रभारी प्रदीप कुमार ने वुजुर्ग पर लात-घूसे बरसाए।
लेकिन इस घटना का वीडियो वायरल हो गया और सीएम अखिलेश यादव ने मामले को संज्ञान में लेते हुए बूढ़े हाथों को टाइपराइटर भिजवा दिया। टाइपराइटर देने गए जिलाधिकारी ने बुजुर्ग से पुलिस के कुकृत्य के लिए न सिर्फ अफसोस जताया, मांफी भी मांगी। कृष्ण कुमार बीते 35 साल से जीपीओ के सामने फुटपाथ पर ही टाइपिंग का काम कर रोजी-रोटी चलाते आ रहे हैं।
वहीं बीते दिनों संचार एवं आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर किए गए सवाल के जवाब आश्वासन दिया कि उन लोगों पर कार्रवाई कर अंकुश लगाया जाएगा जो इस डिजिटल माध्यम से सांप्रदायिक सौहार्द और राष्ट्रीय सुरक्षा को बाधित करने की कोशिश करते हैं।
डिजिटल मंच पर कश्मीर की लड़ाई, पेरिस अटैक की निंदा
हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का राग फिर से अलाप दिया तो सोशल मीडिया पर जंग छिड़ गई। आवाजें भारत के पक्ष में ज्यादा उठीं। यहां तक कि पाकिस्तान के एक पूर्व राजनयिक ने भी ट्वीट किया है कि नवाज शरीफ के भाषण को पाकिस्तान में में तो पसंद किया गया लेकिन बाकी देशों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
वहीं हाल ही में आतंकी वारदातों से दहला पेरिस सोशल मीडिया के एक सशक्त माध्यम की बानगी है। आतंकियों ने भले ही सैकड़ों लोग मार दिए लेकिन सोशल मीडिया पर दुनियाभर से करोड़ों लोगों का विरोध प्रदर्शन नहीं रोक पाए।
देखा जाए तो सोशल मीडिया का ईजाद करने वालों ने इसे महज दोस्ताना और हल्के-फुल्के खुशनुमा पलों को बयां करने के लिए बनाया, लेकिन उनका ये अविष्कार दुनियाभर के तमाम मजलूमों-बेसहारों और पीड़ितों के लिए अदालत बन जाएगा, मुंसिफ बन न्याय करेगा, ये सोचा भी नहीं होगा।