‘आरुषि-हेमराज मर्डर केस में फैसले से पहले दो रात सो नहीं पाया था। फाइल के एक-एक पहलू को रात-रात भर जागकर पढ़ा। अभियोजन और डिफेंस के दिए तर्कों का कई-कई बार अवलोकन करने के बाद आखिर 25 नवंबर को तलवार दंपति को दोषी करार दिया।’
यह कहना है आरुषि-हेमराज हत्याकांड में फैसला सुनाने वाले सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस लाल का।
विशेष न्यायाधीश एस लाल शनिवार को अपने पद से रिटायर हो गए। उनका कहना था कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कई मुकदमों को सुना। सैकड़ों फैसले दिए, मगर आरुषि-हेमराज मर्डर केस उनके कार्यकाल का पहला और आखिरी सबसे अहम मामला था।
न्यायाधीश एस लाल ने बताया कि उनके परिवार में कभी कोई न्याय विभाग में नहीं रहा। उनके पिता किसान थे। इंग्लिश से एमए और एलएलबी करने के बाद पहली बार उनके गुरु आर के अग्रवाल ने उन्हें न्याय विभाग में आने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की।
तीन बार उन्होंने पीसीएस का एग्जाम पास किया। एक बार डिप्टी एसपी और दूसरी बार डीपीआरओ पद के लिए चुने गए। इसके बाद भी उनकी तैयारी जारी रही।
आखिर उन्होंने पीसीएस (जे) निकाला और न्याय विभाग में तैनात हो गए। सीबीआई विशेष न्यायाधीश के पद पर रहने से पूर्व गाजियाबाद में ही वह एसीजेएम, सिविल जज और एडीजे-4 के पद पर रह चुके हैं।
बेटी को गिफ्ट करेंगे गाउन
विशेष न्यायाधीश एस लाल ने फैसला किया है कि वह न्यायिक कार्यकाल के दौरान पहना गया गाउन अपनी बेटी ज्योत्सना यादव को गिफ्ट करेंगे। उनकी बेटी ज्योत्सना हाल ही में न्यायिक विभाग में चुनी गई हैं।
फिलहाल उनकी तैनाती मिर्जापुर में बतौर मुंसिफ मजिस्ट्रेट के पद पर है। रिटायर न्यायाधीश का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान ईमानदारी से न्याय किया है। उनका यह गाउन उनकी बेटी को हमेशा इस बात को याद दिलाता रहेगा।
'अब इलाहाबाद हाईकोर्ट से शुरू होगी नई पारी'
विशेष न्यायाधीश एस लाल अपने जीवन की नई पारी की शुरुआत अब इलाहाबाद से करेंगे। इलाहाबाद होईकोर्ट में उन्होंने प्रैक्टिस किए जाने की बात कही है। उनका कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया से वह खुद को अलग नहीं रख पाएंगे। इसलिए ही उन्होंने निर्णय लिया है कि अब वह हाईकोर्ट में वकालत करेंगे।