यूपी के अलीगढ़ में छात्र से पेशेवर शार्प शूटर बन चुका 5 हजार का इनामी मुनीर वाकई बेहद शातिर दिमाग है। उसने आलमगीर की हत्या की स्क्रिप्ट हालिया रिलीज फिल्म ‘दृश्यम’ को देखने के बाद लिख डाली।
यह बात हत्या के आरोपियों द्वारा खुद खड़े किए जा रहे साक्ष्यों को देख जगजाहिर हो रही है और पुलिस भी अब यही मान रही है। आलमगीर की हत्या करीब 4 बजे हुई और 6:30 बजे नामजद रेहान खुद को दिल्ली में बता रहा है।
7:45 पर उसने दिल्ली के फ्रेंडस कॉलोनी थाने में पर्स चोरी की एफआईआर दर्ज कराई है। इसी तरह सादाब को रात करीब नौ बजे आजमगढ़ के किसी एटीएम केबिन में दिखाया जा रहा है। यह सब ठीक वैसे ही किया जैसे फिल्म दृश्यम में हीरो करता है।
पूरे फिल्मी अंदाज में पेश किए जा रहे हैं सबूत
पुलिस मान रही है कि यह संभव है कि प्लानिंग के तहत यह साक्ष्य पेश किए जा रहे हैं। मगर सीधा जवाब है कि इतने समय में कुछ भी संभव है। फिर भी गिरफ्तारी के बाद खुद आरोपी स्थिति साफ कर देंगे।
बात अगर खुद मुनीर की करें तो अब तक की जांच में साफ हुआ है कि हत्या से आधा घंटे पहले उसे सिविल लाइंस इलाके में देखा गया था। मुनीर पेशेवर शूटर है, यह हत्या उसी ने की है। अब उसके साथ और कौन था, यह गिरफ्तारी के बाद साफ होगा।
इन 7 बिंदुओं पर होगी जांच
1-आशुतोष मिश्रा से डेढ़ साल पहले मारपीट की रंजिश
2-नॉन टीचिंग स्टाफ क्लब में रेड में विवाद जनित रंजिश
3-एएमयू के किरायेदारों से दुकानें खाली कराने की रंजिश
4-हर विवाद में प्रॉक्टर के साथ खड़े रहने से कोई खुन्नस
5-सहारनपुर का नेतृत्व करने पर क्षेत्रवाद की कोई रंजिश
6-एएमयू की किसी गुटबंदी से जुड़ी कोई रंजिश तो नहीं
7-बॉक्सर आलमगीर ने किसी को पीट तो नहीं दिया था
सदमे में है आलमगीर की मां
एएमयू में गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतारे गए बीएसडब्ल्यू के छात्र आलमगीर का परिवार सीबीआई जांच के साथ-साथ शव का पोस्टमार्टम कराने तक को तैयार है।
आलमगीर के भाई ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ेगी तो पोस्टमार्टम कराया जाएगा। मगर इस प्रक्रिया को अम्मी से छिपाना होगा। उस समय भी अम्मी की वजह से शव पोस्टमार्टम के लिए नहीं दिया गया था। हमने अपना भाई तो खो दिया। अब उनकी बात न मानने पर हृदय रोगी मां को अगर कुछ हुआ तो परिवार इस सदमे को नहीं झेल पाता।
%अमर उजाला से बातचीत में मुकदमे के वादी व आलमगीर के बड़े भाई जहांगीर आलम ने सवालों के जवाब में कहा कि उन्हें जब तीन भाइयों में मझले आलम पर हमले की खबर मिली तो वह खुद और छोटे शाह आलम के साथ अलीगढ़ दौड़े चले आए। यहां इतनी बदहवास स्थिति में थे कि कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें।