पानी की गुणवत्ता को लेकर सर्वेक्षण के आंकड़ों की बात करें, तो आश्चर्य होता है। 11 शहरों में से सिर्फ दो शहर कानपुर और गोरखपुर के लोग अपने शहर के पानी को औसत से कम अंक देते हैं। यानी अधिकांश शहरों के लोगों को पीने का जो पानी मिल रहा है, उससे वे संतुष्ट हैं।
बड़े शहरों की बात करें, तो इलाहाबाद में सबसे अधिक 69 फीसदी लोग पानी की गुणवत्ता से संतुष्ट हैं। जबकि दूसरे पायदान पर मेरठ है, जहां 60 फीसदी लोग अपने शहर के पानी को पीने योग्य मानते हैं।
कानपुर की हालत सबसे खराब है, जहां महज 37 फीसदी लोग पानी को पीने लायक मानते हैं। जबकि 37 फीसदी लोगों की राय है कि गुणवत्ता के लिहाज से कानपुर का पानी औसत है यानी न बहुत अच्छा और न बहुत खराब।
पानी की गुणवत्ता के मामले में प्रदेश की राजधानी लखनऊ की स्थिति भी औसत कही जा सकती है। लखनऊ में 54 फीसदी लोग पानी से संतुष्ट हैं, जबकि 25 फीसदी लोग इसे औसत मानते हैं। 21 फीसदी लोग पानी से कतई संतुष्ट नहीं हैं।
गंगा की नगरी वाराणसी में 40 फीसदी लोग ही पानी को पीने योग्य मानते हैं। शहर के 45 फीसदी लोगों का मानना है कि पानी की गुणवत्ता औसत है। 15 फीसदी लोग पानी से असंतुष्ट हैं। वहीं यमुना के किनारे बसे आगरा के 50 फीसदी लोग पानी की गुणवत्ता से संतुष्ट हैं। 33 फीसदी लोग पानी को औसत मानते हैं। 16 फीसदी लोग पानी को बहुत ही खराब मानते हैं।