राजधानी की कैंट विधानसभा का गठन 2008 में हुए परिसीमन के बाद हुआ था। राज्य गठन से पहले यह विधानसभा देहराखास के नाम से जानी जाती थी। इसमें प्रेमनगर, पंडितवाड़ी, गांधी ग्राम, कांवली ग्राम, श्रीदेव सुमन नगर, जीएमएस रोड, कौलागढ़, पश्चिमी पटेलनगर, बिंदाल नदी के किनारे बसी मलिन बस्तियां इस विधानसभा क्षेत्र में शामिल हैं।
कोरोना काल में कैंट क्षेत्र से प्रधानमंत्री राहत कोष व मुख्यमंत्री राहत कोष में 85 लाख से अधिक के चेक जमा कराए गए। लाखों लोगों को मोदी किचन के माध्यम से एक लाख से ज्यादा भोजन पैकेट दिए। इसके अलावा कपूर साहब ने पिछले कई वर्षों से विधायक रहने के दौरान क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास कार्य करवाए हैं। यही कारण है कि लोग उनसे बहुत अधिक प्रेम करते रहे हैं। उन्होंने कैंट विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए जो विजन तैयार किया, उसको प्राथमिकता से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
-सविता कपूर, भाजपा प्रत्याशी
कपूर साहब लंबे समय तक कैंट क्षेत्र के विधायक रहे लेकिन उन्होंने कभी विकास कार्यों पर फोकस नहीं किया। उनके कार्यकाल के दौरान क्षेत्र में कोई ऐसा विकास कार्य नहीं हुआ, जिसे भाजपा या भाजपा प्रत्याशी अपनी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित कर सकें। यही कारण है कि विधानसभा क्षेत्र की जनता परेशान है। शहर के भीतर की विधानसभा में कोई बड़ी परियोजना भी नहीं बनी, जिस पर यह कहा जा सके कि इससे पूरे क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा। जिस क्षेत्र में हम जा रहे हैं, लोग बार-बार यही बात कह रहे हैं।
-सूर्यकांत धस्माना, कांग्रेस प्रत्याशी
कैंट क्षेत्र की जनता ने इस बार बदलाव का मन बनाया है। आम आदमी पार्टी लोगों को मजबूत राजनीतिक विकल्प उपलब्ध कराने जा रही है। प्रदेश की जनता भी अच्छी तरह इस बात को समझती है। इतने लंबे समय तक क्षेत्र में भाजपा विधायक रहने के बावजूद विकास कार्य नहीं हुए हैं। अब लोग विकास के लिए आप की ओर देख रहे हैं।
-रविंद्र सिंह आनंद, आप प्रत्याशी