पीपीपी मोड में संचालित अस्पताल में अव्यवस्थाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। शनिवार को मध्य गंगोल के बरकांडे निवासी राजेंद्र सिंह की 12 वर्षीय बेटी ममता ने उचित उपचार न मिलने पर दम तोड़ दिया। ममता के परिजनों का कहना था कि अस्पताल में उनकी बेटी को सही उपचार नहीं मिल पाया। दवाएं भी बाजार से मंगाई गई थीं।
इधर बालिका का उपचार कर रहे ईएमओ डा. कमलाकांत का कहना है कि लड़की निमोनियां से पीड़ित थी और उसे गंभीर हालत में लाया गया था। इससे पूर्व ईएमओ डा. कुनाल द्वारा लड़की का उपचार किया गया था। शनिवार को उन्होंने स्वयं उसका उपचार किया, उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उपचार के लिए हायर सेंटर ले जाने को कहा। चेयरमैन लता वर्मा का कहना है कि जब सभी रोगियों को हायर सेंटर रेफर ही किया जाना है तो अस्पताल को पीपीपी मोड में देने का क्या औचित्य है।
विशेषज्ञ होता तो बालिका बच जाती
लोहाघाट (चंपावत)। चिकित्साधीक्षक डा. राजेश गुप्ता का कहना है कि बालिका को शनिवार को गंभीर अवस्था में दाखिल किया गया था। अत्यधिक उल्टियां होने से वह डिहाईड्रेसन की शिकार हो गई थी। यदि कोई विशेषज्ञ डाक्टर होता तो बालिका को बचाया जा सकता था।
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चिकित्साधीक्षक का किया घेराव
लोहाघाट (चंपावत)। चिकित्सालय में विशेषज्ञ डाक्टरों का अकाल होने और मरीजों को सुविधाएं न मिलने पर नागरिकों ने शनिवार को अस्पताल प्रबंधक आशीष कुमार का घेराव किया। गोविंद वर्मा, महेश ढेक, शत्रुघन कोठारी, रमेश मेहता, सुंदर लुंठी आदि का कहना था कि जब से अस्पताल का संचालन पीपीपी मोड में गया है, मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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