आरोपियों की कॉल डिटेल से फंस सकते हैं कई और
हिरासत में लिए गए तीनों आरोपियों के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। पता लगाया जा रहा है कि बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन से पहले उनकी किससे बात हुई थी। कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस साल्वर गैंग के सदस्यों और सरगना सहित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश करेगी। पुलिस की टीमें आरोपियों के घर जाएंगी और उनके परिजनों से भी इस संबंध में पूछताछ करेंगी।
पुलिस भर्ती बोर्ड को भेजी जाएगी रिपोर्ट
सिपाही परीक्षा प्रक्रिया में उजागर हुए फर्जीवाड़े की रिपोर्ट पुलिस भर्ती बोर्ड को भेजी जाएगी। इस फर्जीवाड़े के कारण लिखित परीक्षा सवालों के घेरे में आ गई है। बताया जा रहा है कि फर्जीवाड़ा उजागर होने पर लखनऊ के आला अफसरों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए जिले के आला अफसरों से इस संबंध में पूछताछ की है। टीसीएस कंपनी के कर्मचारी की मिलीभगत सामने आने से अफसर भी हैरान हैं।
पीएसी सिपाही भर्ती के रि-मेडिकल टेस्ट में हुई थी धांधली
बीते 28, 29 और 30 अक्तूबर को पुलिस लाइन में पीएसी सिपाही भर्ती के अभ्यर्थियों का रि-मेडिकल टेस्ट होना था। तत्कालीन सीओ कैंट डॉ. अनिल कुमार ने सर्विलांस की मदद से भंडाफोड़ किया कि सिविल पुलिस व पीएसी के सिपाही, डॉक्टरों और दलालों की मिलीभगत से ढाई से तीन लाख रुपये लेकर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।
इस सूचना के आधार पर दो डॉक्टरों सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। वहीं, प्रकरण में वांछित रामनगर पीएसी और गाजीपुर पुलिस लाइन के दो सिपाहियों की तलाश अभी भी जारी है। लगातार दो परीक्षाओं में हुई धांधली से बनारस में हो रही पुलिस और पीएसी की सिपाहियों की भर्ती को लेकर गलत संदेश जा रहा है।