डीएसपी सेखों के अनुसार साल 2018 में उन्हें तत्कालीन निकाय मंत्री नवजोत सिद्ध ने ग्रैंड मैनर होम की जांच करने के लिए कहा था। इस जांच के दौरान कई लोगों के नाम सामने आने लगे। इसमें कुछ लोग मंत्री के नजदीकी थे। जुलाई 2018 में जांच शुरू की, इस दौरान उन पर दबाव शुरू हो गया। क्योंकि जांच करनी थी, इसलिए वह चुपचाप काम करते रहे।
फरवरी 2019 में जांच पूरी कर फाइल सरकार के पास भेज दी। उस समय ही मंत्री आशु ने दो बार उसे फोन कर धमकी दी, यह ऑडियो हर कोई सुन चुका है। इस दौरान नवजोत सिद्धू से निकाय विभाग ले लिया गया और उसके तुरंत बाद ही उनका तबादला कर दिया गया। जबकि उस समय वह विदेश गए हुए थे। इस जांच फाइल पर तत्कालीन निकाय मंत्री और निकाय विभाग के अधिकारी उचित कार्रवाई करने की सिफारिश कर चुके हैं। लेकिन मामला दब चुका है। इसके बाद से वह लगातार प्रताड़ित करने के आरोप लगा रहे हैं।
दो गनमैन सरकार वापस ले चुकी है
सेखों के अनुसार उनके पास तीन गनमैन थे, इसमें दो गनमैन सरकार वापस ले चुकी है। अब उनके पास एक गनमैन है, जिसके बारे में अधिकारियों को पता नहीं है, उसे भी वापस ले लिया जाए, क्योंकि मुझे अब किसी तरह यह मारने की कोशिश में है। अगर निहत्था गनमैन उनके साथ रहा, तो उसे भी कुछ हो सकता है। इसके बावजूद वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
इस मामले में पुलिस के अधिकारियों ने उसका कोई साथ नहीं दिया है। उन्होंने खुद चार दिसंबर को आला अधिकारियों को लिखा था कि या तो कार्रवाई करो या मुझे निलंबित कर दो। पांच दिसंबर को निलंबन के आदेश जारी हो गए। सवाल यही है कि एक सरकारी अफसर को धमकाने पर कार्रवाई कब होगी। इस मामले को लेकर वह पंजाब हरियाणा चीफ जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस और राष्ट्रपति को भी पत्र भेज चुके हैं।