नगर निगम चुनाव में भाग्य आजमाने को बेताब उम्मीदवार टिकट मिलने से पहले ही खुद को किसी न किसी पार्टी का प्रत्याशी बताते हुए प्रचार में जुट गए हैं। इस दौड़ में सबसे ज्यादा उम्मीदवार सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा का झंडा उठाए हैं तो कांग्रेसी कार्यकर्ता भी खुद को पार्टी समर्थित उम्मीदवार बता मैदान में उतर चुके हैं।
हालांकि इन दोनों ही पार्टियों ने बुधवार तक किसी भी उम्मीदवार या समर्थित कार्यकर्ता की सूची जारी नहीं की थी। समय से करीब डेढ़ साल बाद हो रहे नगर निगम चुनाव को लेकर सभी पार्टियों के कार्यकर्ता जोश में हैं।
छह साल तक वार्ड में सामाजिक कार्य कर राजनैतिक जमीन बनाने वाले यह कार्यकर्ता किसी भी कीमत पर पार्षद बनने की तरकीबें लगा रहे हैं। इन कार्यकर्ताओं ने खुद को भाजपा, बसपा या कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी घोषित कर अपनी पार्टी के चुनाव चिन्ह और बड़े नेताओं के चित्र लगे प्रचार वाहन भी वार्ड में उतार दिए हैं।
राजनैतिक चिंतक अशोक भाटिया के मुताबिक टिकट की घोषणा होने से पहले ही खुद को पार्टी का उम्मीदवार घोषित करने वाले कार्यकर्ता दो वजह से ऐसा कर रहे हैं। पहला यह कि वह टिकट के लिए पार्टी में अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहते हैं और पहले प्रचार कर पार्टी नेतृत्व को उन्हें ही चुनने का दबाव बना रहे हैं। दूसरा यह कि इनमें से कई कार्यकर्ताओं को प्रदेश या जिला स्तर के बड़े नेताओं ने टिकट दिलाने का भरोसा दिलाया है।