डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 87वें दीक्षांत समारोह में नई परंपरा शुरू हो रही है। अब समारोह की शोभायात्रा का संचलन (परेड) मंत्रों के साथ होगा। इसके लिए तैत्तिरीय उपनिषद के मंत्रों का अभ्यास शुरू हो गया है। दीक्षांत समारोह 29 मार्च को विश्वविद्यालय के छत्रपति शिवाजी मंडपम् सभागार में होगा।
दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि आध्यात्मिक गुरु स्वामी चिदानंद सरस्वती होंगे। वह मुनि की रेती स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम के संस्थापक अध्यक्ष हैं। वह ऋषिकेश स्थित भारतीय संस्कृति शोध प्रतिष्ठान और पिट्सबर्ग के हिंदू-जैन मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं। यह पहला मौका होगा जब समारोह में आध्यात्मिक गुरु मुख्य अतिथि बनाए गए हैं।
दीक्षांत समारोह में इस बार भी मेधावी और शिक्षकगण भारतीय परिधान में नजर आएंगे। छात्र धोती-कुर्ता और छात्राएं सफेद रंग की साड़ी में नजर आएंगी। साड़ी का किनारा लाल होगा। छात्र धोती और कुर्ता के साथ हाफ जैकेट भी पहन सकते हैं। विश्वविद्यालय के शिक्षकगण भी धोती-कुर्ता ही पहनेंगे। अतिथियों के लिए यह पाबंदी नहीं है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के लिए मेडल से संबंधित 14 आपत्तियां आई थीं। इनका निस्तारण करते हुए अंतिम सूची विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। चीफ प्रॉक्टर प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि 159 मेडल वितरित किए जाएंगे। इन पर आपत्तियां मांगी थीं। 14 विद्यार्थियों की ओर से आपत्तियां मिलीं।
उन्होंने बताया कि एक में एमएससी रसायन की छात्रा ने सर्वाधिक अंक होने की बात कही, जिसके प्रमाणपत्रों का आकलन कर उसे मेडल में शामिल कर लिया है। दूसरी आपत्ति सर्वाधिक अंक की थी, लेकिन छात्रा के ये अंक री-परीक्षा में शामिल होने के बाद थे। विश्वविद्यालय के समारोह के नियमानुसार पहले प्रयास में सर्वाधिक अंक पाने वाले को ही पात्र माना जाता है। इसके अलावा नामों की स्पेलिंग में त्रुटि समेत अन्य गड़बड़ी की शिकायतें थी। इन सभी का समिति ने निस्तारण करते हुए अंतिम सूची विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दी है।