इंदौर में हुकमचंद मिल के श्रमिकों के खाते में पैसा मिलना शुरू हो चुका है। हाऊसिंग बोर्ड ने भी मिल की 42 एकड़ जमीन के लिए कंसलटेंट का टेंडर जारी कर दिया है। बोर्ड मिल की जमीन पर कमर्शियल और रेसीडेंशियल प्रोजेक्ट ला रहा है।
यहां छोटी आईटी कंपनियों के लिए भी दफ्तर बनाए जा सकते है। इस प्रोजेक्ट के धरातल पर आने के बाद शहर के मध्य हिस्से के करीब आधुनिक शहर विकसित हो सकता है,क्योकि राजवाड़ा से तीन किलोमीटर की दूरी पर छह मिलों की 300 एकड़ से ज्यादा जमीन 25 से 30 सालों से खाली पड़ी है। उनमें से दो मिलों की जमीन पहले बिक चुकी है।
होप मिल की जमीन पर चार साल पहले हाऊसिंग बोर्ड ने ही डेढ़ सौ करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट शुरू किया और चार ब्लाॅक में 70 से ज्यादा फ्लैट बनाए। इसके अलावा दुकानें और दफ्तर भी बनाए गए है।
हुकमचंद मिल की जमीन भी बोर्ड ने 485 करोड़ रुपये में खरीदी है। बोर्ड अफसरों का कहना है कि मध्य शहर के पास की लोकेशन होने के कारण मिल की जमीन पर बने प्रोजेक्ट को अच्छा प्रतिसाद मिलना तय है। हुकमचंद मिल के चार किलोमीटर के दायरे में तीन रेलवे स्टेशन और एक बस स्टैंड है।
मालवा मिल की लीज प्रशासन कर चुका है निरस्त
एनटीसी की मालवा मिल की जमीन की लीज पिछले साल तत्कालीन कलेक्टर इलैया राजा टी निरस्त कर चुके है। एनटीसी ने तीन बार मिल की जमीन नीलाम करने की प्रक्रिया की, लेकिन कोई खरीददार नहीं मिले। प्रशासन की लीज निरस्त करने के फैसले से यह माना जा रहा है कि भविष्य में सरकारी विभाग यहां कोई प्रोजेक्ट ला सकता है।
विरोध के बावजूद बिक गई थी स्वदेशी मिल की जमीन
इंदौर में 15 साल पहले स्वदेशी मिल की जमीन 90 करोड़ रुपये में इंडियाबुल कंपनी ने खरीदी थी। इस सौदे का तत्कालीन सांसद सुमित्रा महाजन ने विरोध किया था। सांसद चाहती थी कि वह जमीन रेल विभाग अपनी फैक्ट्री स्थापित करने के लिए खरीदे, लेकिन विभाग ने रुचि नहीं दिखाई, हालांकि कंपनी अभी तक हाऊसिंग प्रोजेक्ट वहां नहीं ला पाई है। हुकमचंद मिल की जमीन पर काम शुरू होने के बाद स्वदेशी मिल की जमीन पर भी कोई प्रोजेक्ट आ सकता है।