मोदी है तो मुमकिन है’, ‘आएगा तो मोदी ही’, ‘ फिर एक बार मोदी सरकार ’ आदि नारे फूलपुर और इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र में इस बार मतदाताओं की जुबां पर चढ़ गए। महागठबंधन को लेकर ज्यादातर राजनीतिक पंडित मान कर चल रहे थे कि पिछले वर्ष हुए फूलपुर लोकसभा उपचुनाव की पुनरावृत्ति फिर से हो जाएगी लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। भाजपा की हर रणनीति और दांव इस बार विरोधियों पर भारी ही पड़े। चुनाव नतीजों ने ‘चकल्लसबाजों ’ को भी चित कर दिया। इस दौरान पर्दे के पीछे संघ की रणनीति पर आगे बढ़कर भाजपा ने अब तक के इतिहास में इलाहाबाद और फूलपुर में सर्वाधिक मत भी पा लिए। वर्ष 2014 की तुलना में इस बार इन दोनों ही सीटों पर मिले मत किसी भी प्रत्याशी के अब तक के सबसे ज्यादा मत है।
वर्ष 2014 के चुनाव में भाजपा के दोनों प्रत्याशियों केशव प्रसाद मौर्य और श्यामा चरण गुप्ता ने इन सीटोें से सर्वाधिक मत पाने का रिकार्ड बनाया था। इसी तर्ज पर इस चुनाव में भी भाजपा ने 2014 का रिकार्ड तोड़ने के साथ अपना रिकार्ड तोड़ते हुए सर्वाधिक मत पाने का रिकार्ड एक बार फिर से बना लिया। मोदी लहर के साथ जीत पक्की करने लिए संघ की रणनीति ने भी बड़ा काम किया। संघ ने दो स्तरों पर जीत की पटकथा लिखी। पहला, मतदाता सूची के आधार पर भाजपा के समानांतर बूथ स्तरीय संगठन खड़ा करना, दूसरे विरोधी नेताओं की हर रणनीति का उन्हीं की शैली में जवाब देना। इस बीच पीएम मोदी की परेड मैदान में हुई चुनावी रैली भी तुरुप के इक्के का काम कर गई। महज तीन दिन की तैयारी में परेड मैदान में पार्टी ने मोदी की रैली करवा दी।
इसके साथ ही चुनाव प्रचार में भाजपा गठबंधन के मुकाबले फ्रंट फुट पर ही रहा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, रेलमंत्री पीयूष गोयल, अनुप्रिया पटेल, जेपी नड्डा, केशव प्रसाद मौर्य, रामविलास पासवान, एसपी सिंह बघेल, सिद्धार्थनाथ सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी आदि ने चुनावी सभाएं कीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आए लेकिन, उनकी चुनावी सभी हंडिया विधानसभा क्षेत्र में हुई। इसके अलावा पार्टी ने अपने पुराने नेताओं नरेंद्र देव पांडेय, राघवेंद्र नाथ मिश्र, डा. नरेंद्र कुमार सिंह गौर, प्रभा शंकर पांडेय, मुरारी लाल अग्रवाल, रणजीत सिंह, डा. एलएस ओझा को भी आगे कर उनके अनुभव का लाभ लिया।