तेंदुए से भिड़कर भाई की जान बचाने वाली शिल्पा को प्रदेश सरकार ने जीवन रक्षक पुरस्कार से नवाजा है। वर्ष 2014 में गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिल्पा को भराड़ी के नायब तहसीलदार विक्रम सिंह ने सम्मानित किया। तहसील कार्यालय में उन्होंने शिल्पा को बतौर जीवन रक्षक पुररूकार 40 हजार का चेक भी दिया।
अपने छोटे भाई को बचाने के लिए तेंदुए से भिड़ने वाली शिल्पा शर्मा को वर्ष 2014 में गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा है। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान वह देश के अन्य बहादुर बच्चों के साथ हाथी की सवारी भी कर चुकी हैं। 27 अक्तूबर, 2012 को शिल्पा और उसका अनुज अंशुल शर्मा के साथ स्कूल जा रही थीं।
उस दौरान वह दसवीं की छात्रा थीं। अचानक तेंदुए ने अंशुल को जबड़े में दबोच लिया। लहुलूहान अंशुल को बचाने के लिए शिल्पा तेंदुए से भिड़ गई। अपने स्कूल बैग और झाड़ियों से तेंदुए पर वार किए और शोर मचाया। तेंदुआ वहां से भाग गया। शिल्पा ने खून से लथपथ भाई को करीब आधा किलोमीटर दूर उठाकर एक ग्रामीण के वहां पहुंचाया। ग्रामीण उसे अस्पताल ले गए।
पांच दिन अस्पताल में रहने के बाद अंशुल को घर भेजा गया। शिल्पा के पिता हिमबुनकर में सेल्जमैन के पद पर हैं। मां गृहिणी हैं। नायब तहसीलदार विक्रम सिंह ने कहा कि शिल्पा की बहादुरी सभी के लिए मिसाल है। जिसने अपनी जान पर खेलकर भाई की जिंदगी को बचाया था। ऐसे साहसी लोगों का समाज में होना बड़ी बात है। इनसे सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। कहा कि प्रदेश सरकार ने शिल्पा को जीवन रक्षा पुरस्कार देने की घोषणा थी। इसका चेक उन्होंने शिल्पा को सौंपा।