हिमाचल प्रदेश का जनजातीय जिला लाहौल स्पीति के गांवों को सौर ऊर्जा से जगमगाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अक्तूबर 2017 तक ढाई मेगावाट के सौर और पवन ऊर्जा संयंत्र का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश ने सौर और पवन ऊर्जा क्षेत्र में नई शुरुआत करते हुए हिमाचल प्रदेश विद्युत बोर्ड लिमिटेड, भारतीय सौर ऊर्जा निगम और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरण ऊर्जा मंत्रालय ने एक नये संयुक्त उपक्रम में सौर ऊर्जा परियोजना कार्यान्वयन के लिए हिमाचल प्रदेश सौर ऊर्जा निगम लिमिटेड के गठन के लिये समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की उपस्थिति में प्रदेश सरकार की ओर से बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक पीसी नेगी तथा भारत सरकार की ओर से भारतीय सौर ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक अश्वनी कुमार ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन के तहत लाहौल स्पीति जिला के काजा के रंगरीक में 2.5 मेगावाट क्षमता का एक हाइब्रिड (सौर एवं पवन) विद्युत संयंत्र स्थापित करने का फैसला लिया गया। इसका निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य सितंबर-अक्तूबर 2017 रखा गया है।
यह परियोजना भारत की अपनी तरह की पहली परियोजना होगी। इसके तहत उच्च ऊर्जा भंडारण की सहायता से सौर, पवन तथा जल विद्युत परियोजना का ग्रिड सप्लाई के साथ समायोजन किया जाएगा। परियोजना के पूरा होने से रंगरीक, काजा, ताबो, लोसर, पिन घाटी तथा साथ लगते क्षेत्रों की 12000 से अधिक बस्तियां लाभान्वित होंगी।
परियोजना की कुल अनुमानित लागत 30 करोड़ 72 लाख रुपये है, जिसमें से पूंजी निवेश का 50 प्रतिशत भाग अनुदान के रूप में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाएगा, जबकि 50 प्रतिशत राशि का वहन हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव वीसी फारका तथा तरुण श्रीधर सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे।
4.41 मिलियन यूनिट बिजली होगी पैदा
शिमला। परियोजना में सालाना लगभग 4.41 मिलियन यूनिट बिजली के उत्पादन की आशा है। इसमें 3.32 मिलियन यूनिट पीवी मॉड्यूल तथा 1.09 मिलियन यूनिट पवन टरबाइन द्वारा तैयार होगी। इसे ग्रिड आपूर्ति की अनुपलब्धता की स्थिति में बैकअप बैटरी द्वारा संरक्षित भी किया जा सकेगा।