उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) की परीक्षाओं में गलतियों का सिलसिला जारी है। मंगलवार को हुई एलएलबी की परीक्षा में विवि ने छात्रों को 000 अंक वाला पेपर बांट दिया। यही नहीं छात्रों को 12 के बजाए 13 अंकों वाला रोल नंबर देने से विवि को दोबारा उत्तर पुस्तिकाएं बांटनी पड़ीं।
छात्रों का आरोप है कि इससे उनका 30 मिनट का समय बर्बाद हो गया। जबकि विवि का कहना है कि उन्होंने छात्रों को अतिरिक्त समय दिया है।
मंगलवार को यूटीयू की एलएलबी पांचवें सेमेस्टर की ‘लॉ ऑफ एविडेंस’ की परीक्षा थी। इसमें छात्रों को जो प्रश्न पत्र दिया गया, उस पर सबसे ऊपर अंक 000 लिखे थे। इसके बाद 15 सवाल तो थे, लेकिन इनमें कौन सा सवाल कितने अंकों का होगा, इसका पता नहीं था। छात्रों को कितने सवाल हल करने हैं, इसकी भी जानकारी नहीं थी। कौन सा सवाल दीर्घ उत्तरीय है और किस सवाल का जवाब कितने शब्दों में देना है, इसकी भी जानकारी नहीं थी।
रोल नंबर गलत बांटे, दोबारा देनी पड़ी आंसर शीट
जब उत्तर पुस्तिका छात्रों को मिली तो समस्या और बढ़ गई। एडमिट कार्ड पर 13 अंकों का रोल नंबर था, जबकि उत्तर पुस्तिका पर 12 अंकों की ही जगह थी।
गत वर्ष तक छात्रों को 12 अंकों का ही रोल नंबर मिलता था। छात्रों ने जैसे-तैसे नया रोल नंबर डाला, लेकिन विवि से भी संपर्क किया गया। विवि ने कहा कि पुराना 12 अंकों वाला ही रोल नंबर मान्य होगा। इसके बाद जीआरडी स्थित परीक्षा केंद्र पर आनन-फानन में उत्तर पुस्तिकाएं वापस ली गईं और नई उत्तर पुस्तिकाएं बांटी गईं।
छात्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया में उनका आधा घंटा बर्बाद हो गया, जबकि विवि ने केवल दस मिनट का अतिरिक्त समय दिया। छात्रों का यह भी कहना है कि गत वर्ष तक उन्हें प्रश्न पत्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में मिलता था, लेकिन इस बार केवल अंग्रेजी में दिया जा रहा है, जिससे परेशानी हो रही है।
अधिकारी का कहना, जल्द ठीक होगी अव्यवस्था
प्रश्न पत्र परीक्षा से आधा घंटा पहले खोला जाता है। हमने समय रहते परीक्षा केंद्रों तक सभी सूचनाएं भिजवाई थीं। उत्तर पुस्तिका के मामले में भी छात्रों को अतिरिक्त समय दिया गया है। जल्द ही सभी व्यवस्थाएं और बेहतर हो जाएंगी।
-प्रो. पीके गर्ग, कुलपति, उत्तराखंड तकनीकी विवि
इस संदर्भ में हमारी बात परीक्षा नियंत्रक से हुई थी। उन्होंने बताया कि छात्रों को वेबसाइट के माध्यम से सूचित किया गया था। हम व्यवस्थाएं दुरुस्त कर रहे हैं। जल्द ही परेशानियां दूर हो जाएंगी।
-पीके जोशी, कुलसचिव, उत्तराखंड तकनीकी विवि