उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को कानूनी लड़ाई के बाद पीसीएस प्री का रिजल्ट घोषित करने का आदेश तो मिला है, लेकिन उत्तराखंड बनने के बाद से ही यहां के युवाओं के लिए पीसीएस सपना मात्र है।
वर्ष 2000 से पूर्व के 15 साल और बाद के 15 साल का आंकड़ा इसी बात की गवाही देता है कि युवाओं का पीसीएस बनने का सपना आयोग की लचर प्रणाली की वजह से पूरा नहीं हो पा रहा है। राज्य बनने से पूर्व के 15 सालों में राज्य से करीब 72 एसडीएम निकले थे, जबकि राज्य बनने के बाद के 15 सालों में अब तक कुल 47 एसडीएम बने।
उत्तराखंड बनने से पूर्व के 15 साल की बात करें तो इस दौरान करीब 13 बार पीसीएस की परीक्षा हुई। इसमें करीब 72 उत्तराखंड निवासी युवा पीसीएस अफसर बने। प्रदेश बनने के बाद उत्तराखंड लोक सेवा आयोग अस्तित्व में आया। पहली परीक्षा पीसीएस 2002 में हुई।
इसका परिणाम वर्ष 2005 में आया, जिसमें 20 एसडीएम में से 15 उत्तराखंड निवासी थे। इसके बाद हुई पीसीएस 2004 का परिणाम वर्ष 2007 में आया। इसमें कुल 14 एसडीएम में से करीब 9 उत्तराखंड निवासी थे।
15 साल में वहां 14 परीक्षाएं, यहां चार
पीसीएस 2006 का रिजल्ट वर्ष 2010 में आया। इसमें 5 एसडीएम में से 2 उत्तराखंड निवासी थे। इस साल आधे रिजल्ट पर यूपी का कब्जा था। इसके बाद पीसीएस 2010 का आयोजन हुआ, जिसका परिणाम वर्ष 2014 में आया।
इसमें 19 एसडीएम में से करीब 16 उत्तराखंड निवासी थे। पीसीएस 2012 की प्री परीक्षा का परिणाम आने के बाद अब मुख्य परीक्षा होनी बाकी है। आंकड़ों पर गौर करें तो उत्तर प्रदेश के जमाने में यहां के युवाओं को एसडीएम बनने का ज्यादा मौका मिलता था।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की लचर कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड बनने के बाद यहां चार पीसीएस परीक्षाएं हो पाई हैं और पांचवीं पीसीएस परीक्षा प्रक्रिया में है।
जबकि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2000 से 2015 तक 14 पीसीएस परीक्षाएं हो चुकी हैं। इसके पीछे हर परीक्षा में अभ्यर्थियों का हाईकोर्ट जाना और आयोग की गड़बड़ियों की वजह से मामला लंबित रहना है। आयोग हर बार कोई न कोई ऐसी गड़बड़ी कर देता है, जिससे अभ्यर्थी हाईकोर्ट चले जाते हैं।
यूपी के जमाने में यहां के युवाओं का खूब एसडीएम बनने का मौका मिलता था। उस वक्त पीसीएस में 1200 तक वैकेंसी निकलती थी, जिसमें 200 से 350 तक भी एसडीएम होते थे। यहां एसडीएम के पद काफी कम निकलते हैं। पीसीएस की बेहद धीमी प्रक्रिया की वजह से 15 साल में केवल चार परीक्षाओं के परिणाम ही जारी हो पाए। पांचवीं परीक्षा एक बार फिर हाईकोर्ट के आदेशों के तहत आगे बढ़ रही है। कहीं न कहीं आयोग की लापरवाही की वजह से पीसीएस का सपना दूर है।
- सुशील कुमार सिंह, निदेशक, निदेशक, प्रयास आईएएस स्टडी सर्किल