उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) की कार्यपरिषद ने नए कैंपस निर्माण में हुए घपले की जांच का आदेश दे दिया है। इसके लिए एक कमेटी का गठन कर 15 दिन में रिपोर्ट देने को कहा है।
इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही दोषी अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों की मानें तो इस जांच में भी पूर्व रजिस्ट्रार यूएस तोमर की गर्दन फंस सकती है। कार्यपरिषद में बिल्डिंग की डिजाइन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में उन पर आरोप तय हो सकते हैं।
कार्यपरिषद ने कर्मचारियों के मुद्दे पर सीधी भर्ती के बजाय शासन को एक बार फिर से 14 वर्षों से काम कर रहे कर्मियों को विनियमित करने का प्रस्ताव भेजने का फैसला लिया है।
कार्यपरिषद के निर्देश पर यूपीटीयू प्रशासन ने आर्किटेक्चर कॉलेज के प्राचार्य व आर्किटेक्चर फैकल्टी के डीन प्रो. जगवीर सिंह को जांच कमेटी का अध्यक्ष बनाया है।
बिल्डिंग निर्माण में भी घपला
जानकीपुरम विस्तार में 32 एकड़ जमीन पर बनाए जा रहे यूपीटीयू के नए कैंपस का निर्माण बीते करीब ढाई वर्षों से लटका हुआ है। इसे जुलाई 2012 में ही पूरा किया जाना था, मगर अभी तक इसका निर्माण ही पूरा नहीं हो पाया।
इसकी डिजाइन तैयार करने में काफी गड़बड़ी की गई है। एलडीए से इसकी डिजाइन पास हुई है या नहीं इसके भी दस्तावेज नहीं मिल रहे। निर्माण कर रही कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम से भी यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मामले में पूछताछ कर चुका है।
इस प्रकरण को अमर उजाला ने बीते 6 अप्रैल के अंक में माई सिटी पेज नंबर पांच पर ‘यूपीटीयू के नए कैंपस के निर्माण में भी हो रहा खेल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
सीधी भर्ती पर भी होगा विचार
खबर में उल्लेख किया गया था कि इसकी बिल्डिंग के निर्माण में घपला किया गया है। कुलपति डॉ. आरके खांडल ने मामले के प्रकाश में आने के बाद राजकीय निर्माण निगम से बिल्डिंग की डिजाइन, इनवॉयरमेंट क्लीयरेंस और एलडीए से पास हुए नक्शे के बारे में जानकारी मांगी थी मगर इसकी जानकारी देने में उसके हाथ पांव फूल गए।
अब यूपीटीयू प्रशासन ने इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए इसे कार्यपरिषद के सामने रखा और कार्यपरिषद ने इसकी जांच के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है।
प्रो. जगवीर सिंह की अध्यक्षता में बनी जांच कमेटी पंद्रह दिन में अपनी रिपोर्ट दे देगी। वहीं दूसरी ओर यूपीटीयू में कर्मचारियों की सीधी भर्ती करने के शासन के प्रस्ताव पर कार्यपरिषद ने पुन: विचार करने को कहा है। अब एक बार फिर यूपीटीयू शासन से 109 कर्मचारियों का विनियमितिकरण करने की मांग करेगी।
निलंबित पूर्व रजिस्ट्रार की जांच रिपोर्ट पेश
कार्यपरिषद की बैठक में यूएस तोमर पर अभी तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की गई। कार्यपरिषद को बताया गया कि 22 मई को यूएस तोमर के खिलाफ संबद्घता प्रकरण में आरोपों की जांच के लिए न्यायामूर्ति आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनायी गई। 24 मई को उन्हें रजिस्ट्रार पद के कार्यों से विरत कर दिया गया।
उनके खिलाफ वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितता के अलावा रजिस्ट्रार पद पर अर्हता की भी जांच हुई। इसमें वह बिना अर्हता के ही रजिस्ट्रार बने थे यह आरोप सिद्घ पाया गया। इसके बाद उन्हें शासन ने निलंबित कर दिया है। बीते दो माह से वह आर्किटेक्चर कॉलेज नहीं जा रहे हैं।
ऐसे में उनका वेतन रोका गया है। अब आगे इस पर फैसला किया जाएगा। यूएस तोमर के एचबीटीआई कानपुर व बीआईटी झांसी में की गई नौकरी के कागजात भी नहीं मिले हैं।
जांच कमेटी की रिपोर्ट के अलावा कार्यपरिषद को यह भी बताया गया कि जब शासन ने यूएस तोमर का बिना अर्हता के रजिस्ट्रार पद पर संविलयन किया था तब यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद में इस मुद्दे को नहीं रखा गया था। ऐसे में अब इस पर आगे यूनिवर्सिटी व शासन मिलकर कार्रवाई करेंगे।