दिल्ली विश्वविद्यालय में अब तीन वर्षीय और चार वर्षीय पाठ्यक्रम लागू करने के मामले में अभी कई नए पेंच फंसते दिख रहे हैं। यूजीसी के आदेश के बावजूद डीयू प्रशासन अपने फैसले पर ही अड़ा है।
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उधर, इस मसले पर अपना रुख सख्त करते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने डीयू के बाद उसके अंतर्गत आने वाले सभी 64 कॉलेजों को पत्र लिखकर नए सत्र 2014-15 में चार वर्षीय पाठ्यक्रम (एफवाईयूपी) के बजाय तीन साल के कोर्स में दाखिले करने का निर्देश दिया है।
विवाद को सुलझाने के लिए सोमवार सुबह से ही यूजीसी के अधिकारियों, एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी और डीयू के कुलपति के बीच बैठकों को दौर जारी है। सूत्रों के अनुसार अभी यूजीसी के इस फैसले पर घमासान लंबा खिंच सकता है।
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लागू होगा तीन वर्षीय पाठ्यक्रम!
सूत्रों के अनुसार, यूजीसी अधिकारियों के साथ स्मृति ईरानी की बैठक में फिलहाल यही रणनीति बनी है कि तीन वर्षीय पाठ्यक्रम ही लागू किया जाएगा। इसके बाद स्मृति ने कहा कि यूजीसी सर्वोच्च है और यूनिवर्सिटी को ये फैसला मानना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि डीयू के इस फैसले का कोई वैधानिक आधार नहीं है। चार वर्षीय पाठ्यक्रम को लागू करने से पहले डीयू ने न तो यूजीसी से राय ली और न ही कुलाधिपति (राष्ट्रपति) से अनुमति ली।
बता दें कि यूजीसी ने कॉलेजों को लिखे पत्र में इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा है और सोमवार दोपहर तक की समय सीमा देते हुए आदेश न मानने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी थी।
तो लंबी चलेगी ये लड़ाई
माना जा रहा है कि यूजीसी के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब डीयू के पास एफवाईयूपी पर कदम पीछे खींचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है और उसे तीन साल के कोर्स के तहत ही दाखिले लेने होंगे।
हालांकि इस मामले में डीयू ने अब तक रुख साफ नहीं किया है। जानकारों के मुताबिक यूजीसी ने डीयू को चेतावनी तो जरूर दी है लेकिन असल में किसी भी विश्वविद्यालय की ग्रांट खत्म करना एक लंबी प्रक्रिया है।
जानकारों के मुताबिक, अगर डीयू इस फैसले को नहीं मानता तो यूजीसी को कोर्ट का सहारा लेना पड़ सकता है। इस मामले में अब सब कुछ डीयू की प्रशासनिक बैठक के बाद ही कुछ हो सकता है।
समिति तय करेगी छात्रों का भविष्य
चार वर्षीय पाठ्यक्रम (एफवाईयूपी) के तहत दाखिला लेकर पढ़ रहे छात्रों के भविष्य पर फैसला करने के लिए यूजीसी ने एक स्थायी समिति बनाई है। यूजीसी के वाइस चेयरमैन कमेटी के अध्यक्ष होंगे।
इसमें छात्र, शिक्षक और डूटा के प्रतिनिधि भी होंगे। कमेटी यह रिपोर्ट तैयार करेगी कि बीते साल लागू हुए चार वर्षीय पाठ्यक्रम को कैसे तीन साल के पाठ्यक्रम में बदला जाए, जिससे छात्रों का नुकसान न हो।
छात्रों को अब कौन सी डिग्री मिलेगी और उनका पाठ्यक्रम कैसे पूरा होगा, इन मुद्दों पर कमेटी काम करेगी। क्योंकि तीन वर्षीय पाठ्यक्रम लागू होने से बीटेक और बीएमएस पाठ्यक्रमों में एडमिशन ले चुके छात्रों के सामने संकट खड़ा हो जाएगा। समस्या ये है कि तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में बीटेक के छात्रों को बीएससी की डिग्री ही मिलेगी।
कल जारी होना है पहला कट-ऑफ
दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए 24 जून को पहली कट ऑफ जारी होनी है। पाठ्यक्रम को लेकर उठे विवाद ने छात्रों की टेंशन बढ़ा दी है।
हालांकि आयोग ने अपने नए आदेश में सभी कॉलेजों से कहा है कि ऑनर्स प्रोग्राम, ह्यूमेनिटी, साइंस और कॉमर्स के सभी कोर्स के लिए तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में ही दाखिला लिया जाए। कॉलेजों से यह भी कहा गया है कि वह तय समय पर ही दाखिला लें।
बता दें कि चार वर्षीय पाठ्यक्रम पिछले सत्र से लागू किया गया था, जिसका छात्र और शिक्षक कड़ा विरोध कर रहे हैं। हालांकि डीयू प्रशासन इसे लागू कराने के रुख पर कायम रहा है। अब यूजीसी के रुख का डीयू के छात्रों और शिक्षकों ने स्वागत किया है।