वैदिक ऋषियों का व्यक्तित्व व जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है।
उन्होंने अपनी युवावस्था में शास्त्रों के अध्ययन के अलावा जो आविष्कार व खोज किए, उनका उदाहरण आज भी दिया जाता है।
मसलन अत्रि मुनि ने ही सबसे पहले इस बात की खोज की कि पत्थरों के टकराने से आग पैदा होती है।
तब वे महज 18 वर्ष के थे। जबकि 25 वर्ष की आयु में उन्होंने कीड़ों को मारने की विधि (कृमिनाशिनी) खोजी।
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जिस पर आज कीटनाशक बनाए जाते हैं। च्यवन ऋषि ने 12 वर्ष की आयु में तैरने की कला का आविष्कार किया। ऐसे ही परशुराम के पूर्वज ‘भृगु’ ऋषि सहित तमाम ऋषियों ने ऐसे कई अविष्कार किए।
जिनकी जानकारी आधुनिक विज्ञान को बाद में हुई। यह कहना है जगद्गुरु रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलपति व प्रख्यात वैदिक शिक्षाविद प्रो. रामानुज देवनाथन का।
वे शनिवार को राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान मानित विश्वविद्यालय में छठे संस्कृत युवा महोत्सव के शुभारम्भ के अवसर पर बोल रहे थे। चार दिवसीय महोत्सव में देश के 11 राज्यों से तकरीबन एक हजार छात्र-छात्राएं शामिल हुए हैं।
इस मौके पर मलेशिया में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलन’ में दो स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर संस्थान का नाम रोशन करने वाले शुभम कुमार के अभिभावक को सम्मानित भी किया गया।
कुलपति प्रो. एपी सच्चिदानन्द ने कहा कि युवा महोत्सव का उद्देश्य छात्रों की आंतरिक शक्ति को उभारना है, ताकि प्रतियोगिता के युग में उनका सर्वांगीण विकास हो सके।
पहले गुरुकुलों में शास्त्र-अध्ययन के अलावा काव्यपाठ, श्लोकान्त्याक्षरी, मल्लविद्या, योगशास्त्र, व्यायाम होते थे, जिसका उद्देश्य स्वस्थ स्पर्धा की भावना पैदा करना होता था।
प्राचार्य प्रो. अर्कनाथ चौधरी ने कहा कि युवा महोत्सव छात्रों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। इससे पूर्व डॉ. नीरज तिवारी ने वैदिक मंगलाचरण व छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
कुल सचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक डॉ. गोपीरमण मिश्र, प्रो. पवन दीक्षित, एसोसिएट प्रो. अवधेश कुमार चौबे सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।
खेल-कूद में दिखा गजब का उत्साह
युवा महोत्सव में होने वाली खेल-कूद प्रतियोगिताओं के पहले दिन गजब का उत्साह छात्र-छात्राओं में देखने को मिला। पहले दिन वॉलीबाल प्रतियोगिता हुई।
जिसमें देशभर में मौजूद सभी संस्कृत मानित विश्वविद्यालयों से आईं टीमों का बेहतरीन प्रदर्शन देखने को मिला। खास बात यह रही कि खेलकूद के दौरान खिलाड़ियों का संस्कृत में ही बातचीत करना अध्यापकों व दर्शकों को खासा पसंद आया।
खिलाड़ी संस्कृत में ही अपने साथियों को समझाते और नाराजगी भी संस्कृत भाषा में ही जाहिर करते दिखे।
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