पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) सीनेट में स्टूडेंट काउंसिल को प्रतिनिधित्व देने की तैयारी शुरू हो गई है। पीयू कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर से लेकर अन्य सीनेटरों ने भी इस पर अपनी मुहर लगा दी है।
यदि सब कुछ ठीक रहा तो 2014 में होने वाली सीनेट में स्टूडेंट काउंसिल प्रधान को सीनेट की सदस्यता मिल जाएगी। इस पर अंतिम मुहर पीयूचांसलर डॉ. हामिद अंसारी से लगनी बाकी है। यूनिवर्सिटी द्वारा गठित कमेटी इस मामले में चांसलर को लिखेगी।
लंबे समय से पीयू सीनेट में पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन, पीयू नॉन टीचिंग एसोसिएशन प्रधान की तरह पीयू काउंसिल प्रधान को भी एक्स ऑफिसो के तहत सीनेट सदस्यता देने की मांग चल रही है।
8 दिसंबर को हुई पीयू सीनेट बैठक में सीनेटर डॉ. दयाल प्रताप सिंह रंधावा ने यह मांग उठाई थी। इस मांग का पीयू के लगभग सभी सीनेटरों ने समर्थन किया था।
सीनेटर मनीष वर्मा ने कहा कि पीयू और संबद्ध कॉलेजों के विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को काउंसिल प्रधान ही बेहतर तरीके से उठा सकते हैं। इस पर पीयू कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर ने भी सहमति जताई।
उन्होंने सीनेट को बताया कि वे इस बारे में पहले ही चांसलर को चिट्ठी लिख चुके हैं। अभी तक इस मामले में दिल्ली से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
कमेटी तैयार करेगी नए सिरे से केस
सीनेट में पीयू कुलपति ने इस बारे में एक कमेटी गठित करने का भरोसा दिलाया। कमेटी में सत्यपाल जैन, डीपीएस रंधावा और कुछ अन्य सीनेटर को शामिल किया जाएगा।
कमेटी पीयू कैलेंडर को ध्यान में रखते हुए और टीचिंग और नॉन टीचिंग एक्स ऑफिसो का हवाला देते हुए चांसलर के पास नए सिरे से केस तैयार कर भेजेगी।
विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दे सीनेट में बहुत कम उठाए जाते हैं। वीसी को दो-तीन बार सीनेट में काउंसिल प्रधान सीट की नामिनेशन देने का ज्ञापन दिया जा चुका है। हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिलते हैं।
चंदन राणा, प्रेजिडेंट, पीयू स्टूडेंट काउंसिल
काउंसिल में सिर्फ प्रधान नहीं, बल्कि एक छात्रा की सीट भी रिजर्व होनी चाहिए। पीयू कैंपस में 75 फीसदी से अधिक लड़कियां हैं। ऐसे में सिर्फ प्रधान (लड़के) को प्रतिनिधित्व देना उचित नहीं है।
-डॉ. आभा शर्मा, सेक्रेटरी, पीयू स्टूडेंट काउंसिल