पीयू कैंपस और एफिलिएटेड 190 कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के नियमों में बदलाव करने का फैसला हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत ही नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया जा रहा है। आगामी 20 अप्रैल को होनी वाली पीयू सिंडीकेट में इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है।
सुप्रीम कोर्ट डबल बेंच जस्टिस टीएस ठाकुर और आरएफ नरीमन ने 16 मार्च को असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए पीएचडी धारकों को नेट से छूट देने के फैसले को गलत ठहराया है। बैंच ने पीएचडी के साथ नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) अनिवार्य करने का फैसला दिया है।
पीयू सीनेट ने 20 दिसंबर 2011 को ही 31 दिसंबर 2009 से पहले पीएचडी कर चुके या रजिस्टर्ड स्कॉलर को नेट से छूट देने का फैसला किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पीयू डीयूआई प्रो. एके भंडारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी की 9 अप्रैल 2015 को महत्वपूर्ण बैठक हुई। कमेटी ने पीयू और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत करने का सुझाव दिया है।