5 अक्तूबर 1997...यही वह तारीख थी जब डॉ. पलाश सेन के दिमाग में एक फितूर कौंधा। एक बैंड बनाने का। और, उन्होंने डॉक्टरी का पेशा छोड़ यूफोरिया बनाया।
आज पंद्रह बरस बाद जब वे अपने बैंड मेंबर्स के साथ आईआईएम कैम्पस में उतरे, तो एजर्नी आसमां छूती नजर आई। रोक सको तो रोक लो गाने पर खूब धमाल हुआ।
जोरदार परफॉर्मेंस के बीच उन्होंने युवाओं से कहा कि जो मन हो वो कीजिए। किसी के दबाव में कुछ मत कीजिए।
कहीं पंजा लड़ाकर भावी प्रबंधक अपना दम-खम दिखाने में लगे हुए थे तो कहीं पर मंच पर अभिनय कला में एक दूसरे को पिछाड़कर आगे निकले की होड़ में लगे हुए थे।
मौका था आईआईएम लखनऊ में आयोजित कल्चरल व स्पोर्ट्स फेस्टिवल ‘वर्चस्व 2013’ का। शनिवार को फेस्ट के दूसरे दिन लगभग सभी जगह मुकाबला लगभग निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया।
स्पोर्ट्स इवेंट चाहे फुटबाल हो या वॉलीबाल सभी में टीमें एक दूसरे को पिछाड़ने के लिए जोर अजमाइश में जुटी हुईं थी। रात में यूफोरिया बैंड ने धूम मचाई। यूफोरिया बैंड के मुख्य गायक व गीतकार पलाश सेन ने युवाओं की धड़कनों को बढ़ा दिया।
सामंजस्य हॉल में सुबह से ही अंतरनाद कार्यक्रम के तहत एक से बढ़कर एक नाटकों का मंचन हुआ। राजधानी के जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के स्टूडेंट ने महाभारत की एक सांझ नाटक का मंचन किया।
उन्होंने दिखाया कि दुर्योधन ने छल-कपट किया तो पांडवों ने भी युद्ध जीतने के लिए नियमों को तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। युद्ध नीति का उल्लंघन करने पर कौरवों ने उन्हें टोका भी।
इसके बाद मुंबई के नारसी मुंजी कॉलेज के स्टूडेंट ने तीन इकाई नाटक का मंचन किया। स्टूडेंट ने दिखाया कि जिंदगी में तमाम दर्द के बावजूद जीने के लिए खुशी के पल खोजे जा सकते हैं।
इस प्रतियोगिता को जीतने के लिए देश भर के सात कॉलेजों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। प्रतियोगिता में जज की भूमिका में वरिष्ठ रंगकर्मी उर्मिल कुमार थपलियाल मौजूद थे।
वहीं पर एड्स के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए बीबीडी एनआईआईटीएम के स्टूडेंट की टीम ने रंगभूमि नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। यहीं के स्टूडेंट्स ने हैरतअंगेज स्टंट्स भी दिखाए। ब्रेकिंग व पम्पिंग में भी करतब दिखाए गए।
फेस्ट में देश भर से 60 से अधिक शिक्षण संस्थानों के 1000 स्टूडेंट भाग लेने आए हैं। इसमें आईआईएम, आईआईटी के अलावा निफ्ट सहित कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान शामिल हैं।
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