शिक्षा निदेशायल ने नर्सरी एडमिशन प्रॉसेस 25 अप्रैल तक हर हाल में समाप्त करने की घोषणा की थी। ऐसा न होने पर इस साल दाखिले न करने का मन बनाया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने निदेशायल को ऐसा करने से मना कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार मामले का हल निकाल कर नर्सरी में एडमिशन प्रॉसेस जरूर शुरू होने चाहिए। लेकिन बात मामले का हल निकालने पर ही टिकी है।
फर्स्ट एडमिशन लिस्ट 28 फरवरी को आनी थी, लेकिन इंटरस्टेट ट्रांसफर के 5 पॉइंट कैंसल किए जाने के बाद शिक्षा निदेशालय ने पहली लिस्ट के लिए 15 मार्च की डेट तय की थी। तब से इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है।
चौथी बार सुनवाई टली
दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सरी एडमिशन पर लगी रोक और बढ़ा दी है। अब इस मामले की सुनवाई 3 अप्रैल यानी बृहस्पतिवार को होगी।
इससे पहले भी दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सरी एडमिशन पर लगी रोक पर होने वाली सुनवाई तीन बार आगे बढ़ा चुका है। बुधवार को यह चौथा मौका था जब दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई की तारीख आगे बढ़ाई।
दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सरी एडमिशन प्रक्रिया पर 24 मार्च तक रोक लगाने और मामले पर 28 मार्च से हो रही सुनवाई पर अब तक चार बार तिथि आगे बढ़ाई गई है।
कहां उलझा है मामला?
दरअसल, दिसंबर में तत्कालीन केजरीवाल सरकार ने इस बार नर्सरी एडमिशन की गाइडलान में फेरबदल किए थी। लेकिन उनकी सरकार जाने के बाद उनके द्वारा किए गए बदलावों में फिर से मॉडिफिकेशन किया गया। इससे मामला उलझ गया और जिनको दाखिला मिल चुका था उन्हें भी फिर से दाखिला कराने की नौबत आ गई।
दरअसल, मामले में अभिभावकों ने उप-राज्यपाल की ओर से जारी की गई नई एडमिशन गाइडलाइंस को चुनौती दी थी। प्वाइंट सिस्टम मामले पर निजी स्कूलों और अभिभावकों के बीच चल रहे इस विवाद पर फैसला नहीं हो पा रहा है।
इस मामले में पूर्ववर्ती छात्रों के भाई बहनों को 5 अंक देने और पूर्व छात्र के बच्चों को 20 फीसदी अंक देने को चुनौती दी गई है।
अदालत क्यों नहीं निकाल पा रही हल?
सुप्रीम कोर्ट ने हर हाल में दिल्ली में नर्सरी एडमिशन किए जाने के पक्ष में है। इसीलिए उसने शिक्षा निदेशालय के इस साल एडमिशन न किए जाने की बात नहीं मानी थी और मामले का हल निकाल कर हर हाल में एडमिशन किए जाने की बात कह दी थी।
इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट में चला गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सरी एडमिशन प्रक्रिया पर पहले 24 मार्च तक रोक लगा दी। फिर 28 मार्च से सुनवाई शुरू की। लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकाल पाई। जबकि बृहस्पतिवार को कोर्ट ने चौथी बार सुनवाई की तारीख आगे बढ़ा दी।
दरअसल, कोर्ट ने सरकार से प्राइवेट स्कूलों का डाटा मांगा था। लेकिन डाटा उपलब्ध न होने पर कोर्ट कोई फैसला नहीं सुना पा रही है। बृहस्पतिवार को भी इसी मामले पर सुनवाई हुई। लेकिन फिर से कोई हल नहीं निकल सका।