प्रायोगिक परीक्षाओं में मनमानी रोकने के लिए कानपुर विश्वविद्यालय ने कई कदम उठाए हैं। यहां तक कि 75 फीसदी से अधिक अंक देने पर परीक्षक को कारण बताना होगा। इतना ही नहीं प्रायोगिक परीक्षा की कॉपी भी घर नहीं मंगाई जा सकेगी। परीक्षक को आंतरिक मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के साथ ग्रुप फोटो खिंचवानी होगी।
विश्वविद्यालय की ओर से गठित एक्सपर्ट कमेटी ने प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए आठ बिंदुओं वाला मानक तय किया है। परीक्षा में इन मानकों का पालन अनिवार्य होगा। इसका आदेश परीक्षा नियंत्रक की ओर से सभी कालेजों को भेजा गया है। इसके तहत मौखिक परीक्षा के लिए हर परीक्षार्थी को पांच से आठ मिनट का समय देना होगा।
परीक्षक को किसी परीक्षार्थी को 75 फीसदी से अधिक अंक देने पर कारण बताना होगा। इतना ही नहीं लिखित परीक्षा में मिले अंक से भी इसकी तुलना की जाएगी। परीक्षक की ओर से दिए गए अंक को ऑनलाइन भी करना होगा। इसके अलावा प्रायोगिक परीक्षा में उपयोग की गई उत्तर पुस्तिका भी विश्वविद्यालय को भेजी जाएगी। परीक्षा नियंत्रक का यह निर्देश सभी कालेजों में पहुंच गया है।