केस एक : छात्र विकास यादव ने एलयू में सत्र 2014-15 में बीए प्रथम वर्ष में दाखिला लिया है। उसका रजिस्ट्रेशन नंबर 100301983 है। इस छात्र को लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से जो परिचय पत्र (आईकार्ड) जारी किया गया है, उसमें सब्जेक्ट नहीं लिखे गए हैं।
दरअसल, यूनिवर्सिटी प्रशासन को भी यह नहीं मालूम है कि यह छात्र किन सब्जेक्ट में पढ़ रहा है। यूनिवर्सिटी के पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में बिना सब्जेक्ट आवंटित किए ही इस छात्र को बीए में दाखिला दे दिया गया।
केस दो : छात्र विनीत कुमार गौतम का रजिस्ट्रेशन नंबर 100301391 है। इसे भी बीए प्रथम वर्ष में दाखिला मिला है लेकिन जो परिचय पत्र (आईकार्ड) दिया गया है उसमें इसके सब्जेक्ट नहीं लिखे गए। यूनिवर्सिटी प्रशासन को प्रवेश अनुभाग की ओर से इस छात्र के सब्जेक्ट का कोई ब्यौरा नहीं दिया गया।
प्रवेश समन्वयक की ओर से भी कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाया गया कि इस छात्र को किन-किन सब्जेक्ट में प्रवेश मिला है। सत्र खत्म होने के अब सिर्फ ढाई महीने ही बाकी हैं और छात्र के सब्जेक्ट कोई नहीं जानता।
दाखिले के नाम पर खिलवाड़
ये उदाहरण बानगी हैं कि लखनऊ विश्वविद्यालय में किस तरह स्नातक में दाखिले के नाम पर खिलवाड़ किया गया है। बीए प्रथम वर्ष में दाखिला पाने वाले छात्रों के सब्जेक्ट का रिकॉर्ड खुद यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास नहीं है। अगर होता तो आईकार्ड पर सब्जेक्ट का कॉलम खाली न छोड़ा जाता।
सूत्रों की मानें, तो यूनिवर्सिटी में आईकार्ड का वितरण अभी तक इसलिए ही नहीं हो पा रहा था कि बड़ी संख्या में दाखिला पाने वाले छात्रों के सब्जेक्ट यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड में ही नहीं हैं। इसकी जानकारी न तो प्रवेश समन्वयक दे पा रहे थे न ही ग्रीवांस कमेटी के अधिकारी।
सूत्रों की मानें, तो करीब पांच से छह बार एलयू में इस मुद्दे पर अधिकारियों की बैठक हुई। यही नहीं, बीकॉम प्रथम वर्ष में काउंसलिंग फॉर्म अगम सिंह, अरुण कुमार व कृतिका चतुर्वेदी आदि के भरे गए हैं, उसमें किसी भी अधिकारी ने अपने हस्ताक्षर नहीं किए।
स्टूडेंट ने लिखा पीएम मोदी और ईरानी को पत्र
बगैर काउंसलिंग फॉर्म पर अधिकारी के हस्ताक्षर हुए ही छात्रों की फीस जमा करवा दी गई। अब सवाल उठाए जा रहे हैं कि ग्रिवांस कमेटी के माध्यम से हुए दाखिले में कई नीचे की मेरिट वाले छात्रों को या फिर आवेदन न करने वालों को दबाव में दाखिला दे दिया गया, जिसके कारण अब यह स्थिति उत्पन्न हो गई है।
फिलहाल छात्रा निर्मला श्रीवास्तव की ओर से साक्ष्यों के साथ मामले की लिखित शिकायत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी व कुलाधिपति राम नाईक से कर दी गई है।
लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय कहते हैं कि अगर इस तरह का कोई मामला उठाया गया है तो निश्चित तौर पर यूनिवर्सिटी प्रशासन इसकी जांच करवाएगी।
बीए व बीकॉम फर्स्ट ईयर में वर्ष 2014-15 में हुए दाखिले का पूरा ब्यौरा तलब किया जाएगा। अगर कहीं कोई गड़बड़ी सामने आ रही है तो हम गलत ढंग से दाखिला पाने वालों को मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं करेंगे।