लखनऊ विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को अब एग्जाम में बी कॉपी नहीं दी जाएगी। इसकी जगह अब उन्हें 40 पेज की एक कॉपी मिलेगी।
वहीं, उत्तरपुस्तिका जांचन के लिए अब मुख्यपृष्ठ पर ओएमआर शीट होगी, जिस पर अंक चढ़ाए जाएंगे। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देश पर अब एलयू मार्क्सशीट पर स्टूडेंट्स की फोटो छपवाएगा।
इसका फायदा होगा कि वेरिफिकेशन के लिए छात्र-छात्राओं को धक्के नहीं खाने होंगे। फर्जी मार्क्सशीट बनाने का भी खेल खत्म हो जाएगा।
यह महत्वपूर्ण निर्णय शुक्रवार को लखनऊ विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति की बैठक में लिए गए। कुलपति डॉ. एसबी निमसे की अध्यक्षता में यह बैठक हुई।
शुक्रवार को हुई परीक्षा समिति की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अब स्नातक में पर्यावरण अध्ययन अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा।
ऐसे में राष्ट्रगौरव की परीक्षा में जो स्टूडेंट्स फेल हैं और इस कारण उनकी डिग्री फंसी हुई है, उन्हें वर्ष 2015 में होने वाली परीक्षा में अंतिम मौका दिया जाएगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने परीक्षा सुधार के लिए एक कमेटी भी गठित कर दी है।
इसमें लुआक्टा अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार पांडेय, महामंत्री डॉ. अंशु केडिया, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय, भूगर्भ विज्ञान विभाग के प्रोफेसर विभूति राय सहित तीन अन्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।
यह एलयू की परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव देंगे। यूनिवर्सिटी प्रशासन पहले ही घोषणा कर चुका है कि वे परीक्षा के सिस्टम में बदलाव करेगा।