नेशनल काउंसिल फार टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) ने बीएड के पेपर का पैटर्न और मार्क्स तय कर दिया है। अब प्रैक्टिकल मार्क्स अलग-अलग नहीं दिए जा सकेंगे। हर स्टूडेंट्स के लिए 20 सप्ताह की फील्ड ट्रेनिंग अनिवार्य कर दी गई है। यही नहीं दो वर्षीय बीएड की पढ़ाई भी सेमेस्टर सिस्टम से होगी। हर छह महीने में एग्जाम कराके रिजल्ट घोषित किया जाएगा।
यूपी के 11 राज्य विश्वविद्यालय और उनसे संबद्ध 1200 से ज्यादा कॉलेजों में बीएड की 1.40 लाख सीटें हैं। हर विश्वविद्यालय के पेपर का पैटर्न और मार्क्स देने की व्यवस्था अलग-अलग है। छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी का प्रैक्टिकल एग्जाम 200 मार्क्स का होता है।
पूर्वांचल सहित तमाम विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जहां कि प्रैक्टिकल एग्जाम 400 मार्क्स का होता है। इससे शिक्षकों की नियुक्ति की मेरिट लिस्ट बनाने में काफी दिक्कत होती थी। इसको ध्यान में रखकर ही एनसीटीई ने पहली बार पेपर का पैटर्न, उसके मार्क्स निर्धारित कर दिए हैं।
अब सभी राज्य विश्वविद्यालयों को बीएड के समान कोर्स की पढ़ाई, परीक्षा करानी पड़ेगी। उत्तर प्रदेश स्व वित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने बताया कि कानपुर यूनिवर्सिटी से बीएड के 150 कॉलेज संबद्ध हैं। 20 हजार से ज्यादा सीटें भरी जाती हैं।