जिले की जेल अब कारावास कम और स्कूल ज्यादा बन गई है। यहां के जेलर का कैदियों में रौब तो है पर जेलर वाला नहीं, एक प्रिंसिपल वाला। प्रदेश की जेलों अब भले ही सुधार गृह की संज्ञा दी जाती हो, लेकिन करनाल की जिला जेल वास्तव में सुधार गृह के साथ-साथ एक संस्थान में तब्दील हो चुकी है।
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एक ऐसे संस्थान में जहां कैदी-हवालाती चक्की नहीं पीसते, किताबें बांचते हैं। पढ़ते-लिखते हैं। संगीत और पेंटिंग सीखते हैं। खिलौने, सजावटी सामान और कपड़ा बनाते हैं। जेल में वर्तमान में करीब 2200 कैदी और हवालाती हैं। इनमें से लगभग 1100 कैदियों ने अक्षर ज्ञान सीखा है।
कुछ तो ऐसे हैं जो यहां पूरी तरह से अनपढ़ आए, लेकिन अब पढ़ना लिखना सीख चुके हैं। जो मैट्रिक थे, वे अब ग्रेजुएट हो चुके हैं और जो ग्रेजुएट थे वे पोस्ट ग्रेजुएट। यहां के जेलर शेर सिंह को इन प्रयासों के चलते राष्ट्रपति अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।
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550 कैदी इग्नू में एनरॉल्ड
जेल के 550 कैदी इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी में एनरॉल्ड हैं। इनमें से 198 बीपीपी यानी बैचलर्स प्रीपरेटरी प्रोग्राम कर चुके हैं और 352 का कोर्स चल रहा है। 152 ने दिसंबर 2013 में परीक्षा दी और 19 जून 2014 में परीक्षा में बैठेंगे।
45 कैदी ग्रेजुएशन के प्रथम वर्ष में, नौ द्वितीय वर्ष और 27 कैदी बीए फाइनल में पढ़ रहे हैं। 227 कैदी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) से व्यावसायिक शिक्षा ले रहे हैं।
112 कैदी ऐसे हैं, जो निरक्षर थे और अब पढ़ना-लिखना सीख चुके हैं। शिक्षा विभाग की ओर से अध्यापक समुंदर मोर इन कैदियों को जेल के अंदर ही एक स्कूल में पढ़ाते हैं। उन्हें डेपुटेशन पर जेल स्कूल में भेजा गया है।
हत्या, डकैती के आरोपी हुए पोस्ट ग्रेजुएट
हत्या, डकैती, लूट जैसे संगीन आरोपों में सजा काट रहे सुनील ने जेल में एमए इतिहास, दहेज हत्या के आरोपी संजय ने एमकॉम और हत्या के आरोपी लखविंद्र सिंह ने एमए अंग्रेजी जेल में रहकर ही पूरी की।
दहेज हत्या के आरोप में सजायाफ्ता जेबीटी टीचर राजेंद्र ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री हासिल की। चार अन्य कैदी बीए की पढ़ाई कर रहे हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दूरवर्ती शिक्षा निदेशालय से इन कैदियों की पढ़ाई चल रही है।
जेल में संगीत और पेंटिंग एकेडमी भी
इस जेल के अंदर ही संगीत और पेंटिंग एकेडमी चल रही है। जिन कैदियों की रुचि होती है, वे थोड़े से प्रोत्साहन के बाद सीखने लगते हैं। आगरा का जोरा मोहम्मद जेल में डकैती की सजा काट रहा है। वे संगीत एकेडमी में कव्वाली और भजन गायन में निपुण हो चुका है।
सतीश कत्थक सीख चुका है तो डकैती में अंदर आया सोमवीर अभिनय में माहिर हो रहा है। पंजाब के तरनतारन के जितेंद्र सिंह, होशियार सिंह, जगतार सिंह हत्या के जुर्म में जेल काट रहे हैं। वह भंगड़ा और अभिनय निपुण हो चुका है।
डकैती में बंद सुल्तान, हत्यारोपी सतीश और एनडीपीएस में सजा काट रहा त्रिलोक बिश्नोई खूबसूरत चित्रकारी करते हैं। उन्होंने यह कला जेल में ही सीखी।
कैदी जन्म से अपराधी नहीं है। समय और परिस्थितियों ने उन्हें यहां तक पहुंचाया है। जेल में रहकर भी वे मुख्यधारा के साथ चलते रहें, इसलिए उनके शिक्षण, प्रशिक्षण, हस्तकला की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। समाज के लोगों के सहयोग से यह प्रयास चल रहे हैं। - शेर सिंह, अधीक्षक, जिला जेल करनाल
पहले जेल से पढ़ने वाले कैदियों और बंदियों से फीस ली जाती थी, लेकिन जेल प्रशासन और हमारे प्रयासों से अब उन्हें निशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। हमारा उद्देश्य है कि जो लोग दुर्भाग्यवश अपराध की तरफ चले गए हैं, उन्हें फिर से मुख्यधारा से जोड़ा जाए ताकि वे बाहर निकलकर अपनी रोजी-रोटी कमा सकें। - डॉ. अशोक शर्मा, रिजनल डायरेक्टर इग्नू करनाल