पैसे वाले वर्ग की चहेती मानी जाने वाली इंजीनियरिंग में जाना एक गरीब के लिए वैसे सिर्फ सपना माना जाता है।
वह भी तब, जब सिर पर पिता का साया न हो और मां घरों में बर्तन धोकर गुजारा करती हो। लेकिन देहराखास नदी के किनारे स्थित एक झोपड़पट्टी के इस गरीब परिवार के लिए यह बेहद गर्व का मौका है। बेटे किशन सिंह ने जेईई मेंस परीक्षा पास कर एडवांस के लिए क्वालिफाई कर लिया। अब किशन का सपना एक कामयाब इंजीनियर बनना है।
किशन सिंह बड़ा होने लगा तो पिता किशोरी सिंह ने मजदूरी का दंश मिटाकर उसे पढ़ाने और आगे बढ़ाने का फैसला किया। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। जब किशन महज पांच साल का था तो पिता का साया सिर से उठ गया। अब मां सीमा मुनि के लिए उस सपने को पूरा करने की पहाड़ सी चुनौती थी।
मां ने बच्चे को पढ़ाने का फैसला किया, लेकिन यह इतना आसान नहीं था। सबसे बड़ी समस्या पैसों की थी। थोड़ा मुश्किल था लेकिन जल्द ही फैसला किया कि मां मजदूरी करके बच्चे को पढ़ाएगी। जैसे-तैसे सरकारी स्कूल से 12वीं पास कर ली। किशन का सपना अब इंजीनियर बनना था।
इस सपने को पूरा करने में कोचिंग एक बड़ी जरूरत थी, लेकिन मां के लिए यह नामुमकिन था। तब किसी ने उन्हें बलूनी क्लासेज के बारे में बताया। मां अपने बेटे को लेकर यहां पहुंची। बलूनी क्लासेज ने बच्चे को मुफ्त कोचिंग का फैसला किया।
दो साल की कड़ी मेहनत के बाद सोमवार को आए जेईई मेंस के रिजल्ट में किशन सिंह ने ओबीसी वर्ग में 86 अंक लाकर जेईई एडवांस के लिए क्वालिफाई कर लिया।
बलूनी क्लासेज के एमडी विपिन बलूनी ने बताया कि बच्चे के भीतर आगे बढ़ने की चाहत थी, लेकिन आर्थिक हालात रुकावट बन रहे थे। बलूनी ग्रुप आफ एजुकेशन ने उसे मुफ्त कोचिंग देने का फैसला किया, जो बच्चे के इस सुखद परिणाम के तौर पर सामने है।