शहर के सरकारी स्कूलों में तैनात काउंसलर की सेवाएं 30 सितंबर के बाद खत्म हो सकती हैं। कांट्रैक्ट रिन्यू नहीं किए जाने को लेकर काउंसलर को शिक्षा विभाग से जानकारी मिल गई है। शिक्षकों का कांट्रैक्ट 2 से 3 महीने बाद रिन्यू करने की बात कही गई है।
शहर के 107 सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 1.30 लाख बच्चों की काउंसिलिंग के लिए 2013 में 52 काउंसलर को कांट्रेक्ट पर रखा था। एक काउंसलर को 2 से 3 स्कूलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांट्रेक्ट रिन्यू नहीं किए जाने को लेकर काउंसलर खफा हैं।
6 साल में भी नहीं बढ़ा वेतन
एक काउंसलर ने बताया कि शिक्षा विभाग ने सबसे पहले 2009 में काउंसलर की नियुक्ति की थी। 2011 में काउंसलर को हटा दिया गया। सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट द्वारा आत्महत्या और हिंसक मामला बढ़ने के बाद 2013 में फिर से काउंसलर नियुक्ति किए गए। 6 सालों से काउंसलर को सिर्फ 8 हजार वेतन दिया जा रहा है। जबकि सरकारी स्कूलों में कार्यरत गेस्ट, एसएसए और कांट्रेक्ट टीचर्स के वेतन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
गेस्ट टीचर्स को लेकर स्कूल हेड कर रहे मनमानी
शहर के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 70 गेस्ट टीचर के मामले में स्कूल हेड मनमानी कर रहे हैं। कुछ स्कूल हेड गेस्ट टीचर्स की परीक्षाओं में ड्यूटी लगा रहे हैं, जबकि कुछ ने मना कर दिया है। शिक्षा विभाग द्वारा पीजीटी पद सेे निकाले गए इन 70 गेस्ट टीचर्स को टीजीटी पदों पर दोबारा से रख लिया गया था।
बाकी गेस्ट टीचर्स को महीने में फिक्स सैलरी मिलती है। जबकि 70 गेस्ट को पीरियड के हिसाब से भुगतान किया जाता है। एक गेस्ट टीचर ने बताया कि सेक्टर-54, 40, 32 और 33 सरकारी स्कूलों में गेस्ट की ड्यूटी लगाई गई है। जबकि कई स्कूल हेड ने मना कर दिया है।
इस संबंध में कई गेस्ट टीचर्स डीपीआई (स्कूल), शिक्षा सचिव और एडवाइजर केके शर्मा से भी मिल चुके हैं, लेकिन किसी भी अधिकारी ने संतोषजनक कार्रवाई की बात नहीं की है।