अब इंटरनल परीक्षा में उत्तराखंड तकनीकी विवि की ओर से थ्योरी में पास छात्र को सीधे 60 प्रतिशत अंक देने का प्रावधान समाप्त हो चुका है।
कॉलेजों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने छात्र का खुद मूल्यांकन कर उसे इंटरनल में फेल न करें। उत्तराखंड तकनीकी विवि की परीक्षा समिति की बैठक में कई और नियमों में बदलाव किए गए हैं।
16 दिसंबर से शुरू होंगी परीक्षाएं
सुद्धोवाला स्थित विवि परिसर में परीक्षा समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में तय किया गया कि बीएचएचसीटी की सेमेस्टर परीक्षाएं 16 दिसंबर से शुरू होंगी जबकि एमबीए, एमसीए, बीफार्मा, बीटेक जैसे पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं 26 दिसंबर से शुरू होंगी।
बैठक में तय किया गया है कि जिस कॉलेज में छात्र संख्या 100 से कम होगी या उस पर पहले नकल जैसा कोई आरोप होगा तो उसे परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा।
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बैठक में नकल के मामलों के निस्तारण के लिए अनुचित साधन प्रयोग समिति का गठन भी किया गया है। समिति में कुलसचिव अवनीश जैन और उपकुलसचिव डॉ. आशीष उनियाल को शामिल किया गया है।
इंटरनल परीक्षाओं में कॉलेजों की ओर से फेल करने के प्रावधानों पर विचार और नए नियमों से अवगत कराने के लिए एक मॉडरेशन कमेटी का गठन किया गया है।
बैठक में कुलपति प्रो. वीके जैन, कुलसचिव अवनीश जैन, परीक्षा नियंत्रक आरके सिंह, ओएसडी एसपी सचान, उपकुलसचिव आशीष उनियाल व अवधेश नौटियाल के अलावा 11 कॉलेजों के निदेशक भी मौजूद रहे।
केंद्रीयकृत होगा कॉपियों का मूल्यांकन
अभी तक कॉलेज विवि पर आरोप लगाते थे कि एक कॉलेज की कॉपियां दूसरे कॉलेज में जांची जाने की वजह से छात्रों का परिणाम प्रभावित होता है।
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इस आरोप से मुक्ति दिलाते हुए विवि ने व्यवस्था की है कि प्रदेशभर के छात्रों की कॉपियों के मूल्यांकन की पद्धति अब केंद्रीयकृत होगी। विवि एक केंद्र बनाएगा जहां अलग-अलग कोर्स की सभी कॉपियां जंचेंगी।
स्पेशल बैक की मनाही पर लगी मुहर
परीक्षा समिति की बैठक में स्पेशल बैक परीक्षा न कराने के नियम पर भी मुहर लग गई है। तय किया गया कि केवल बैक परीक्षा आयोजित कराई जाएगी, जो कि नियमानुसार होगी।
इसके लिए अब अलग से कोई स्पेशल बैक परीक्षा आयोजित नहीं कराई जाएगी। नए नियम को पूर्णरूप से लागू कराने के लिए समिति का गठन होगा, जिसके लिए उपकुलसचिव डॉ. आशीष उनियाल को अधिकृत किया गया है।
बनी समिति
सभी यूजी कोर्स व पीजी कोर्स में थ्योरी व प्रैक्टिकल अंकों की विषमता भी दूर करने का प्रयास शुरू हो गया है। विवि ने इसके लिए एक मॉडरेशन कमेटी का गठन किया है जो यह तय करेगी कि विवि के सभी यूजी या पीजी कोर्स में समान अंक हों। मसलन बीफार्मा, बीटेक, बीएचएमसीटी जैसे कोर्स में थ्योरी व प्रैक्टिकल के अंकों में समानता होगी।