यूपी बोर्ड परीक्षा में केंद्र बनाने के लिए मंत्री और सचिवालय स्तर तक सेटिंग की जाती है। सेटिंग गड़बड़ाते ही कॉलेज सूची से बाहर हो जाता है। बीते वर्ष की अपेक्षा इस बार परीक्षार्थियों की संख्या करीब चार हजार कम है, इसलिए केंद्रों की जरूरत भी कम है।
आवश्यकता नहीं का आधार बताकर इस बार राजधानी में सात परीक्षा केंद्रों का पत्ता साफ किया गया है। इसके बावजूद चार नए केंद्र बनाए गए हैं। सवाल उठता है कि संख्या कम होने के कारण परीक्षा केंद्रों के नाम काटे गए थे तो नए परीक्षा केंद्र बनाने की जरूरत क्या पड़ी।
बीते वर्ष यूपी बोर्ड में एक लाख, 12 हजार परीक्षार्थी थे। इस बार एक लाख, आठ हजार स्टूडेंट्स परीक्षा देंगे। ऐसे में परीक्षा केंद्रों की संख्या कम होना लाजिमी था। फर्जी पंजीकरण के आरोपी तीन कॉलेजों को केंद्र नहीं बनाया गया।
दो कॉलेजों के केंद्र बनने से मना करने और एक कॉलेज डिबार होने के कारण सूची से बाहर हो गया। सात कॉलेजों को जरूरत न होने की बात कहकर सेंटर नहीं बनाया गया। इसके बावजूद चार नए कॉलेज बृजभूषण, स्वर्गीय सुरेश चंद्र द्विवेदी हाईस्कूल, पायनियर मांटेसरी, एसडी मेमोरियल इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र बनाए गए।
शिक्षा माफियों के दबाव में बने नए सेंटर
शिक्षक संगठन का आरोप है कि नए कॉलेज शिक्षा माफियाओं के दबाव में बनाए गए हैं। पिछली बार फाइनल सूची आने के बाद अचानक प्रियदर्शी इंटर कॉलेज का नाम जुड़ गया था। यह कॉलेज इस साल भी लिस्ट में शामिल है।
परीक्षार्थियों के लिए दूरी कम करने का बहाना बनाते हुए हर साल निजी विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया जाता है। इस साल भी ऐसा किया गया है। इसके बावजूद एडेड कॉलेज गांधी विद्यालय का परीक्षा केंद्र करीब 20 किलोमीटर दूर राजकीय सैनिक इंटर कॉलेज में डाला गया।
यूपी बोर्ड परीक्षा 2014 के दौरान परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप में केवल एक कॉलेज के खिलाफ डिबार की संस्तुति की गई। सहायता प्राप्त विद्यालय यशोदा रस्तोगी गर्ल्स इंटर कॉलेज को गलत प्रश्नपत्र खोलने के आरोप में काली सूची में डाला गया है।
शिक्षा अधिकारियों का भी मानना है कि गलती से प्रश्नपत्र खुलने की जानकारी खुद कॉलेज की ओर से दी गई थी। इसके बावजूद कॉलेज को काली सूची में डाल दिया। वहीं, जानबूझकर फर्जी और विषय विशेषज्ञ कॉलेजों के खिलाफ किसी प्रकार की संस्तुति नहीं की गई। नतीजा यह हुआ ये सभी कॉलेज परीक्षा केंद्र बन गए।
ये कहते हैं अधिकारी
जिला विद्यालय निरीक्षक पीसी यादव का कहना है कि इस साल परीक्षार्थियों की संख्या बीते साल के मुकाबले कम थी। इस वजह से कई कॉलेजों के नाम जिला परीक्षा समिति ने सूची से हटा दिए हैं।
कुछ कॉलेजों को जांच रिपोर्ट के आधार पर भी परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया है। बृजभूषण और स्वर्गीय सुरेश चंद्र द्विवेदी हाईस्कूल को माल क्षेत्र के दो कॉलेजों को सूची से हटाने के कारण और पायनियर मांटेसरी, एसडी मेमोरियल इंटर कॉलेज प्रशासन की ओर से अनुरोध करने के बाद बढ़ाया गया है।
वहीं उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के मंत्री और प्रदेशीय प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्रा कहते हैं कि हर साल शिक्षा माफियाओं के दबाव में परीक्षा केंद्र बनाए जाते हैं। यह खेल बहुत ऊंचे स्तर से खेला जाता है। परीक्षार्थियों की संख्या कम होने पर परीक्षा केंद्रों की संख्या कम करना सही है लेकिन नए परीक्षा केंद्रों को शामिल करना सही नहीं है। बिना किसी दबाव में अगर परीक्षा केंद्र बनाया जाए तो यह संख्या 125 से ज्यादा नहीं पहुंचेगी।