एक वक्त में जिस डीएवी को प्रदेश की शान माना जाता था, आज उसका रुतबा कितना घट गया है। राजनीति के चलते लगातार हो रही बदनामी का असर पहाड़ के दूसरे हिस्सों से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों पर पड़ता है।
छात्र जब किराए पर कमरा लेने जाते हैं तो डीएवी का नाम सुनते ही उन्हें मना कर दिया जाता है। डीएवी की इस बदहाल स्थिति के सुधार के तमाम फोन काल सोमवार को अमर उजाला हेल्पलाइन नंबर पर आए।
'छात्रों के प्रवेश में समयबद्धता हो। जब छात्र परीक्षा में बैठे तो उसकी कक्षा में उपस्थिति का भी ध्यान रखा जाए। डीएवी कालेज में 1975 से पहले जैसा माहौल था, वैसा हो। नहीं तो छात्र पढे लिखे अनपढ़ हो जाएंगे।'
सूर्यमणि, देहरादून
'अगर प्रबंधन यह पहल कर रहा है कि इवनिंग कक्षाएं चलेंगी तो इसका शुल्क अहम बात है। अन्य शिक्षा संस्थानों में भी इवनिंग क्लास चल रही है। वहां फीस का ज्यादा अंतर नहीं होता है। छात्र नेताओं को भी इस बात को समझना चाहिए कि यदि छात्र हित में कोई बात है तो उसका बेवजह विरोध न करें।'
नितिन जोशी, एसएफआई
'मेरा मन भी बड़ा दुखी है। मैंने 1967 में डीएवी में दाखिला किया था। मैं लॉ करके पासआउट हो गया था। उस वक्त में ऐसा कुछ भी नहीं होता था। कालेज को गुंडागर्दी का संस्थान बना दिया है। एडमिशन पर नियंत्रण हो। हमारे वक्त में साढ़े तीन से चार हजार छात्र होते थे। सभी पाठ्यक्रमों के मिलाकर। कक्षाएं भी पूरी चलती थी। 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य थी। राजनीतिक दल भी बेवजह यहां हस्तक्षेप कर रहे हैं।'
रमेश शर्मा, पूर्व महासचिव, डीएवी कालेज
'डीएवी में बदहाली के लिए कालेज प्रशासन और शिक्षक भी जिम्मेदार हैं। छात्रों की मनमानी राजनीति को कालेज प्रशासन की ओर से हमेशा सपोर्ट किया जाता है। अब कालेज केवल राजनीति का अड्ड़ा ही रह गया है। लोग अब बच्चों को यहां पढ़ाने केलिए भी कई बार सोचते हैं। व्यवस्थाएं दुरुस्त होनी चाहिएं। डीएवी कालेज से राजनीति को दूर किया जाए।'
डा. एम अली, देहरादून
'कालेज में व्यवस्था सुधार के लिए कम से कम 80 प्रतिशत कक्षाओं में उपस्थिति को अनिवार्य किया जाना चाहिए। राजनीति करने वाले छात्र का चरित्र देखकर ही उसे टिकट देना चाहिए।'
हुकुम सिंह पंवार, सहस्त्रधारा रोड
'मैंने डीएवी से बीएससी पास किया है। जब मैं टिहरी से यहां आया था तो जब भी कहीं किराए पर कमरा देखने के लिए जाता तो डीएवी का नाम सुनते ही सब मना कर देते। आम इंसान भी डीएवी कालेज को गुंडागर्दी की पाठशाला मानने लगा है। यहां व्यवस्था बनाने के लिए एक ड्रेस कोड हो और चुनाव को इतनी महत्ता न दी जाए।'
नरेंद्र रौंछेला, वाया ईमेल
'डीएवी में गंदी राजनीति और इससे हो रहे नुकसान पर काबू पाने के लिए प्रशासन को सख्त होने की जरूरत है। अगर व्यवस्था बनानी है तो कुछ सख्त कदम उठाने पड़ेंगे।'
काशिफ, ईमेल
'डीएवी में माहौल तभी सुधर सकता है, जब बाहरी राजनीति और छात्र संघ की वजह से लागू हो रहे मेरिट सिस्टम पर विरोध नहीं बल्कि आम राय बने। मेरिट से दाखिला होगा तो छात्रों में एक पढ़ने की ललक पैदा होगी।'
अंकित, ईमेल